घर-घर राशन योजना पर क्रेंद्र और दिल्ली सरकार आमने-सामने

by Disha
0 comment

केजरीवाल सरकार की घर-घर राशन पहुँचाने की योजना के केंद्र सरकार द्वारा खारिज किए जाने के बाद अब केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार राशन माफ़िया के नियंत्रण में है।

 

रविशंकर प्रसाद/Business Standard

 

कुछ ही देर पहले रविशंकर प्रसाद ने एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘फ़ूड सिक्योरिटी ऐक्ट’ के तहत ‘भारत सरकार बड़ी संख्या में दिल्ली के लिए अनाज देती है लेकिन केजरीवाल सरकार केंद्र सरकार पर बिना कारण घर-घर राशन योजना रोकने का आरोप लगा रही है।’

उन्होंने आगे ये भी कहा कि अगर दिल्ली सरकार के पास कोई बेहतर विकल्प मौजूद है तो वे उसका प्रस्ताव भेजें, केंद्र सरकार खुले मन से उसपर विचार करेगी।

 

क्यों रोका गया ‘वन नेशन वन राशन’?

क़ानून मंत्री ने कहा कि ‘2013 में मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले से लागू किए गए फ़ूड सिक्योरिटी ऐक्ट के तहत राशन की दुकानों के ज़रिए सामान लोगों तक पहुँचाया जाता है। इसी क़ानून के तहत राशन की सभी दुकानों का नियमित तौर पर ऑडिट करने का प्रावधान है।’

मोदी सरकार ने सत्ता में आने में बाद देश में ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ लागू किया है जिसे अबतक केवल तीन राज्यों में यह लागू नहीं किया गया है- दिल्ली, पश्चिम बंगाल और असम।

 

Credit- Hindustan Times

 

रविशंकर ने आगे जोड़ा, “जनवरी 2018 में दिल्ली में राशन वितरण में ई-ऑथेन्टिकेशन लागू किया गया लेकिन इसे चार महीनों बाद रोक दिया गया और अब तक शुरू नहीं किया गया। इस दौरान चार लाख फ़र्जी राशन कार्ड पकड़े गए।”
“लेकिन तर्क ये दिया गया कि तकनीक सही तरीके से काम नहीं कर रही है। यदि ऐसा था तो दूसरे राज्यों में ये कैसे लागू हो रहा है?”

उन्होंने कहा कि फ़र्जी राशन कार्ड पकड़े जाने के बाद राशन माफ़िया ने दिल्ली सरकार पर दबाव डालक इस योजना को लागू करने से रोक दिया है।

रविशंकर ने कहा कि राशन लेने की प्रक्रिया में दुकान से इसे ख़रीदने और दुकान पर ई-ऑथेन्टिकेशन का महत्वपूर्ण भूमिका है। अब अगर इसे घर-घर पहुँचाया जाएगा और आँकड़ा नहीं रखा जाएगा तो राशन के हिसाब में गड़बड़ी होगी।

रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि दिल्ली में कितने अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को राशन दिया गया है दिल्ली सरकार के पास इसका भी कोई आंकड़ा नहीं है।
उन्होंने कहा, “अगर आप तकनीक के ज़रिए अनाज किसे मिल रहा है ये सुनिश्चित नहीं कर सकते, इसका ई-ऑथेन्टिकेशन नहीं करा सकते तो आप किस आधार पर घर-घर राशन व्यवस्था शुरू कर रहे हैं?”

 

केजरीवाल का केंद्र पर आरोप

इसके पहले केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार पर घर-घर राशन व्यवस्था शुरू करने से पहले ही उसे रोकने का आरोप लगाया था।
केजरीवाल ने सवाल किया था कि अगर पिज़्ज़ा, बर्गर, स्मार्टफ़ोन और कपड़ों की घरों पर डिलिवरी हो सकती है तो ग़रीबों के घरों में राशन की डिलिवरी क्यों नहीं हो सकती?

 

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल/Hindustan Times

केजरीवाल का कहना था कि सरकार ये दलील दी रही है कि राशन दुकानदार इस योजना के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट गए थे इसलिए वे इस योजना को लागू नहीं करना चाहते।

उन्होंने केंद्र सरकार पर राशन माफ़िया का समर्थन देने का आरोप लगाया है और कहा, “राशन दुकानदार इसके ख़िलाफ़ कोर्ट में स्टे लेने गए थे। कोर्ट ने इन्हें स्टे देने से मना कर दिया। जब कोर्ट ने स्टे नहीं दिया तो आपके इस योजना पर कैसे स्टे लगा दिया?”

केजरीवाल ने कहा कि इस मामले में कोर्ट में केंद्र सरकार भी एक पक्ष है लेकिन उन्होंने कोर्ट में उसका विरोध नहीं किया।
उन्होंने सवाल किया, “अगर कोर्ट में आपने विरोध नहीं क्या तो बाहर क्यों विरोध कर रहे हैं?”

 

Credit- TOI

 

अरविंद केजरीवाल ने राशन की दुकानों को कोरोना के लिए ‘सुपर स्प्रेडर’ कहा है और साथ ही कहा कि कोरोना काल में पूरे देश में घर-घर राशन पहुँचाया जाना चाहिए। इससे कोरोना को क़ाबू करने में मदद मिलेगी।

About Post Author