September 24, 2021

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तलाक के लिए केरल हाई कोर्ट का अहम फ़ैसला, मैरिटल रेप भी है तलाक़ के दावे का मज़बूत आधार

शुक्रवार को तलाक़ के मामलों में अहम फ़ैसला सुनाते हुए केरल उच्च न्यायालय ने कहा कि मैरिटल रेप (वैवाहिक बलात्कार) तलाक का दावा करने का एक अच्छा आधार हो सकता है।

 

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न्यायमूर्ति ए. मोहम्मद मुस्तक़ और न्यायमूर्ति के. एडप्पागथ की बेंच ने ये फ़ैसला उस अपील के ख़िलाफ़ सुनाया जिसमें एक फ़ैमिली कोर्ट के क्रूरता के आधार पर तलाक देने के फ़ैसले को चुनौती दी गई थी और दाम्पत्य जीवन की बहाली के लिए एक याचिका को खारिज कर दिया गया था।

फ़ैमिली कोर्ट ने तलाक देते हुए कहा था कि पति अक्सर अपनी पत्नी को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के अलावा अपने ससुर से वित्तीय सहायता भी मांगता है।
उच्च न्यायालय ने फ़ैमिली कोर्ट के फ़ैसले से एक क़दम आगे बढ़कर फ़ैसला सुनाया कि “पत्नी की स्वायत्तता की अवहेलना करने वाला पति का अनैतिक स्वभाव मैरिटल रेप है, हालांकि इस तरह के आचरण को दंडित नहीं किया जा सकता है, यह शारीरिक और मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है। केवल इस कारण से क़ानून मैरिटल रेप को मान्यता नहीं दे सकता। पीनल क़ानून अदालत को तलाक देने के लिए क्रूरता के रूप में इसे पहचानने से नहीं रोकता है। इसलिए, हमारा विचार है कि मैरिटल रेप तलाक का दावा करने का एक अच्छा आधार है।”

पीठ ने यह भी कहा कि मैरिटल रेप भारतीय कानून के तहत एक अपराध नहीं है, लेकिन यह क्रूरता की श्रेणी में आता है और इसलिए पत्नी को तलाक का अधिकार मिल सकता है।

यह भी नोट किया गया कि पति के “धन और सेक्स के लिए अतृप्त इच्छा” ने प्रतिवादी को तलाक का निर्णय लेने के लिए मजबूर किया था।

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