October 24, 2021

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रेप पीड़िताओं की प्रेग्नेंसी पर केरल हाइकोर्ट का आदेश, एक हफ़्ते में यह अबॉर्शन करवाने का तीसरा मामला

केरल में नाबालिगों पर बढ़ते यौन उत्पीड़न के साथ, बलात्कार पीड़ितों को अपनी गर्भावस्था की समाप्ति के लिए उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

 

 

हाल ही में एक मामले में, यौन उत्पीड़न के बाद 8 हफ़्ते की गर्भवती, 16 वर्षीय नाबालिग लड़की ने गर्भावस्था की समाप्ति के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था।

सितंबर में गर्भावस्था की समाप्ति के लिए केरल हाइकोर्ट में दायर की गई यह तीसरी ऐसी याचिका है।
इस बाबत, केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक अन्य नाबालिग बलात्कार पीड़िता की सहायता के लिए, उसे चिकित्सकीय मदद से अबॉर्शन की अनुमति दी।

पिछले एक सप्ताह में उच्च न्यायालय द्वारा पारित यह तीसरा ऐसा आदेश है, जिसमें से पहला आदेश 14 सितंबर को आया था। पहले के दो मामलों में, पीड़िता 26 सप्ताह से अधिक गर्भवती थीं और एक मेडिकल बोर्ड की सिफ़ारिश के आधार पर उनका गर्भपात किया गया था।

नवीनतम मामले में, 16 वर्षीय पीड़िता 8 हफ़्ते की गर्भवती थीं और उसे अदालत का रुख करना पड़ा क्योंकि अबॉर्शन करने के लिए उसने जिस निजी अस्पताल से संपर्क किया था, उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया क्योंकि ये एक आपराधिक मामला था।

राज्य सरकार के वकील ने कहा कि तत्काल मामले में अदालत की इजाज़त की ज़रूरत नहीं थी क्योंकि ‘मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेग्नेंसी एक्ट’ के तहत, एक चिकित्सक द्वारा 12 सप्ताह से कम की गर्भावस्था को निरस्त किया जा सकता है यदि उसकी राय है क्योंकि ऐसा न करना पीड़िता के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा।

इसके बाद, उच्च न्यायालय ने लड़की के पिता को गर्भावस्था के चिकित्सकीय अबॉर्शन के लिए तत्काल आदेश की एक कॉपी के साथ सरकारी अस्पताल जाने का निर्देश दिया।

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