May 13, 2021

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चुनाव आयोग के फ़ैसले के विरोध में ममता बनर्जी ने दिया धरना

चुनाव आयोग की ओर से टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी पर 24 घंटे के लिए चुनाव प्रचार के लिए रोक लगाए जाने पर वे धरने पर बैठ गई हैं। उन्होंने मंगलवार की दोपहर 12 बजे से कोलकाता में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन शुरू किया है।

यह इलाक़ा सेना का है और अब तक सेना से उन्हें इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली है।सेना का कहना है कि इतने कम समय में अनुमति नहीं दी जा सकती, इसमें लंबी प्रक्रिया का पालन करना होता है।

विपक्ष ने लिया धरने को आड़े हाँथ

भाजपा में ममता बनर्जी के धरना प्रदर्शन को लेकर उनपर निशाना साधा है और कहा है कि एक मुख्यमंत्री होकर इस प्रकार धरना देना उन्हें शोभा नहीं देता।
प्रदेश भजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि “ममता पर चौबीस घंटे नहीं बल्कि चुनाव संपन्न होने तक पाबंदी लगाई जानी चाहिए थी।”
कांग्रेस और सीपीएम जैसी विपक्षी पार्टियों ने भी ममता के धरने की आलोचना की है। हालांकि उन्होंने चुनाव प्रचार पर पाबंदी की बाबत आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं।

क्या है पूरा मामला?

ममता बनर्जी की केंद्रीय बलों के लिए टिप्पणी और कथित तौर पर धार्मिक लहज़े वाले बयान के बाद सोमवार को चुनाव आयोग ने उनके चुनाव प्रचार पर पाबंदी लगा दी थी।
आयोग ने अपने आदेश में कहा, “आयोग पूरे राज्य में क़ानून व्यवस्था की गंभीर समस्याएं पैदा कर सकने वाले ऐसे बयानों की निंदा करता है और ममता बनर्जी को सख्त चेतावनी देते हुए सलाह देता है कि आदर्श आचार संहिता प्रभावी होने के दौरान सार्वजनिक अभिव्यक्तियों के दौरान ऐसे बयानों से बचें।” 
Credit- Twitter
आयोग ने अपने आदेश में ममता बनर्जी के भाषण के प्रमुख हिस्सों के भी उल्लेख किया।
आयोग के मुताबिक़ ममता बनर्जी ने कहा था, “मैं अपने अल्पसंख्यक भाइयों और बहनों से हाथ जोड़कर अनुरोध करती हूं कि बीजेपी से पैसा लेने वाले शैतान की बात सुनकर अल्पसंख्यक वोटों को बंटने नहीं दें। वह कई सांप्रदायिक बयान देता है और हिंदू और मुस्लिमों के बीच झगड़े की आग लगाता है।”
इस बयान पर उन्हें चुनाव आयोग ने ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजा था जिसके बाद अपनी सफ़ाई में ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने केवल मतदाताओं, ख़ासतौर पर महिलाओं से अपील की थी कि यदि सशस्त्र बल द्वारा उनके मतदान के अधिकार में कोई बाधा हो तो वे ‘घेराव’ कर अपना विरोध दर्ज करें।
उनकी दलील थी, “घेराव सार्वजनिक प्रदर्शन दर्ज करने का एक लोकतांत्रिक तरीका है और उसे अवैध मानने की कोई वजह नहीं है।” 
इस मामले में चुनाव आयोग ने पहले ममता बनर्जी को ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजा और फिर उनका जवाब संतोषजनक न लगने पर उनके चुनाव प्रचार पर 24 घंटे के लिए पाबंदी लगा दी।
चुनाव आयोग के इस फ़ैसले के बाद ममता बनर्जी ने ट्वीट कर धरना देने का ऐलान किया था।तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग के इस क़दम को लोकतंत्र के विरोध में माना।
बता दें कि धरना स्थल पर ममता बनर्जी अकेली हैं, उनके साथ उनकी पार्टी का कोई कार्यकर्ता नहीं है।

चुनाव आयोग पर उठते विपक्ष के सवाल

सीपीएम ने आयोग के इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाया और अन्य लोगों पर भी कार्यवाही करने की माँग की है।
सीपीएम नेता सुजन चक्रवर्ती कहते हैं, “ममता को दी गई कारण बताओ नोटिस के संदर्भ में ही आयोग ने यह पाबंदी लगाई है। लेकिन क्या प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष या सायंतन बसु और राहुल सिन्हा जैसे नेताओं के ख़िलाफ़ भी ऐसी कार्रवाई की जा सकती है? अगर नहीं तो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल जरूर खड़े होंगे।”  
इसके साथ ही कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग के इस क़दम में निष्पक्षता तलाशने की कोशिश की है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब्दुल मन्नान ने कहा है, “आयोग को अगर अपनी निष्पक्षता साबित करनी है तो उसे प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई करनी चाहिए।”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी ने भी ममता बनर्जी पर निशाना साधा है और कहा, “राज्य सरकार ने बीजेपी नेताओं के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की है। अब उनको धरने के ज़रिए आग में घी डाल कर राजनीति नहीं करनी चाहिए।”
हालाँकि उन्होंने चुनाव आयोग के इस क़दम की भी आलोचना की है, उन्होंने कहा, “आयोग शांतिपूर्ण चुनाव कराने में नाकाम रहा है। शीतलकुची की फायरिंग की सीबीआई जांच कराने के बाद दोषियों को सख्त सज़ा दी जानी चाहिए।”
इस पूरे मामले पर राजनीतिक पर्यवेक्षक प्रोफ़ेसर समीरन पाल का मानना है कि, “ममता को आयोग की पाबंदी का सम्मान करना चाहिए। लेकिन धरने पर उनके ख़िलाफ़ पाबंदी की मियाद बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।”
इन आरोप-प्रत्यारोपों और सियासी खींचतान के बीच जनता का झुकाव किस ओर जाता है यह तो समय ही बताएगा।
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