October 24, 2021

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चुनाव से पहले मीडिया के सर्वेक्षण पर रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखूँगी’ – मायावती

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने शनिवार को कहा कि वह चुनाव आयोग को पत्र लिखकर मीडिया संगठनों और अन्य एजेंसियों द्वारा सर्वेक्षण पर किसी भी चुनाव से छह महीने पहले प्रतिबंध लगाने की मांग करेंगी ताकि इससे चुनाव किसी भी तरह प्रभावित न हो।

 

Credit- Deccan Herald

बसपा संस्थापक कांशीराम की 15वीं पुण्यतिथि पर कांशीराम स्मारक स्थल पर संबोधित करते हुए मायावती ने मांग की कि दिवंगत दलित नेता को भारत रत्न दिया जाए और कहा कि उत्तर प्रदेश के लोगों ने राज्य में सत्ता बदलने का मन बना लिया है।

उन्होंने कहा, “जल्द ही चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा जाएगा कि व्यापार की आड़ में, मीडिया संगठनों और अन्य एजेंसियों द्वारा चुनाव से छह महीने पहले सर्वेक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया जाए ताकि विशेष राज्य में चुनाव प्रभावित न हों।”

बसपा सुप्रीमो ने आगे कहा, “आप जानते हैं कि जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे थे, सर्वेक्षण दिखा रहे थे कि ममता बनर्जी पीछे चल रही हैं, लेकिन जब परिणाम आए, तो यह विपरीत था। जो (सत्ता पाने) का सपना देख रहे थे, उनके सपने चकनाचूर हो गए, और ममता (बनर्जी) ने भारी बहुमत के साथ वापसी की। इसलिए, आपको इन सर्वेक्षणों से गुमराह नहीं होना चाहिए।”

मायावती की टिप्पणी एक सर्वेक्षण में एक समाचार चैनल द्वारा दिखाए जाने के एक दिन बाद आई है, जिसमें दिखाया गया है कि भाजपा आगामी 2022 के विधानसभा चुनावों में यूपी में सबसे अधिक सीटें जीतने और सत्ता बरकरार रखने के लिए तैयार है।

 

‘वे हिंदू-मुसलमान रंग देंगे’

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र और यूपी सरकारें माहौल बनाने के लिए राज्य मशीनरी का उपयोग कर रहे हैं।

इस बाबत उन्होंने कहा, “यह भी सभी को पता है कि जब ये हथकंडे काम नहीं करेंगे, तो वह पार्टी (भाजपा) अंततः चुनाव को हिंदू-मुस्लिम रंग देगी, और इसकी आड़ में पूरा राजनीतिक फ़ायदा उठाने की कोशिश करेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव लड़ा जाना है।”

मायावती ने किसी पार्टी का नाम लिए बग़ैर यह भी कहा, ”छोटी पार्टियां और संगठन हैं, जो अकेले या संयुक्त रूप से चुनाव लड़ सकते हैं। उनका काम चुनाव जीतना नहीं है, बल्कि सत्ताधारी पार्टी को पर्दे के पीछे से फ़ायदा पहुंचाना है। इसमें निहित स्वार्थ का एहसास करें। इसलिए, इन जातियों और समुदायों के लोगों को इन पार्टियों और संगठनों के प्रभाव में नहीं आना चाहिए।”

बता दें कि भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने पिछले महीने दावा किया था कि भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद जल्द ही भागीदारी संकल्प मोर्चा का हिस्सा होंगे और इस संबंध में औपचारिक घोषणा 27 अक्टूबर को एक रैली में की जाएगी।

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