September 28, 2021

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Morning News Headlines : सुबह की सुर्खियों पर एक नज़र

1- कोवीशील्ड के दोनों डोज में 84 दिन का अंतर ज्यादा सुरक्षित, कोवीशील्ड की पहली और दूसरी खुराक में 84 दिन का अंतर वायरस के खिलाफ ज्यादा सुरक्षित है। केंद्र सरकार ने केरल हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर यह बात कही है। दरअसल, केरल हाईकोर्ट में एक कंपनी की ओर से याचिका लगाई गई थी। इसमें कंपनी के कर्मचारियों को बिना 84 दिन का इंतजार किए कोवीशील्ड टीके की दूसरी खुराक लगाने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

Reuters

2- हमें कश्मीर के मुस्लिमों के लिए आवाज उठाने का हक, तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी सरकार के ऐलान से पहले रंग दिखाना शुरू कर दिया है। भारत के साथ अच्छे रिश्ते रखने की बात करने वाले तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने एक इंटरव्यू में कहा है कि तालिबान को कश्मीर समेत पूरी दुनिया के मुसलमानों की आवाज उठाने का हक है। शाहीन ने कहा कि मुस्लिम हमारे लोग हैं, हमारे नागरिक हैं। कानूनन उन्हें बराबरी का अधिकार है।

Credit AP

3- ब्रह्मकुमारी रीति-रिवाजों से किया गया सिद्धार्थ शुक्ला का अंतिम संस्कार, एक्टर सिद्धार्थ शुक्ला का मुंबई के ओशिवारा श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार ब्रह्मकुमारी रीति-रिवाजों के मुताबिक हुआ। सिद्धार्थ बचपन से ही इस संस्था से जुड़े थे। श्मशान घाट पर सेलिब्रिटीज और फैंस की भीड़ ने उन्हें अंतिम विदाई दी। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले भी श्मशान घाट पहुंचे। 40 साल के सिद्धार्थ का गुरुवार को हार्ट अटैक से निधन हो गया था।

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4- स्वस्थ बच्चों को कोरोना वैक्सीन की जरूरत नहीं, ब्रिटेन की वैक्सीन एडवाइजरी बॉडी JCVI ने 12 से 15 साल के स्वस्थ बच्चों को कोरोना का टीका लगाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। डेली मेल के मुताबिक, JCVI ने कहा कि स्वस्थ बच्चों को वायरस से कम खतरा है। हालांकि पैनल ने ये भी कहा है कि इसी उम्र के ऐसे 2 लाख बच्चों को वैक्सीन दी जानी चाहिए, जो किडनी, हार्ट और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।

Credit- Reuters

5- आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रही पुलिस, दिल्ली में पिछले साल हुए दंगों को लेकर दिल्ली की एक कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि बंटवारे के बाद के सबसे बुरे दंगे की जैसी जांच दिल्ली पुलिस ने की है, यह दुखदाई है। जब इतिहास पलटकर इसे देखेगा तो यह लोकतंत्र के प्रहरियों को दुख पहुंचाएगा। यह जांच संवेदनाहीन और निष्क्रिय साबित हुई है। ये और कुछ नहीं बल्कि हमारी आंखों में धूल झोंकने की कोशिश है।

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