April 11, 2021

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म्यामांर में लोकतंत्र के लिए ‘ख़ूनी संघर्ष’, 100 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत

रविवार को म्यामांर की सेना और प्रदर्शनकारी नागरिकों के बीच ‘आर्म्ड फ़ोर्सेज़ डे’ के मौक़े पर ज़बरदस्त झड़प हुई है। 
ख़बरों के मुताबिक़ 100 से ज़्यादा प्रदर्शकारी मारे गए हैं जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। 
इस पूरी घटना पर देश-विदेश से प्रतिक्रियाएँ आयी हैं और सभी ने सेना के इस निष्ठुरता की भर्त्सना की है।
इसी कड़ी में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने इस घटना के विषय में ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा-
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने ट्वीट किया है-
“बर्मा के सुरक्षाबलों के ज़रिए किए गए ख़ून-ख़राबे से हमलोग स्तब्ध हैं। ऐसा लगता है कि मिलिट्री जुनटा कुछ लोगों की सेवा करने के लिए आम लोगों की ज़िंदगी क़ुर्बान कर देगी। मैं पीड़ितों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं भेजता हूँ। बर्मा की बहादुर जनता ने सेना के आंतक के युग को नकार दिया है।”
वहीं ब्रितानी राजदूत डेन चग में एक बयान में कहा कि जिस तरह म्यांमार की सेना ने निहत्थे नागरिकों पर बरबर्ता दिखाई है, उससे उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा खो दी है।
अमेरिकी दूतावास ने भी इसी तरह का बयान देकर म्यांमार की सेना की आलोचना की है।

सेना का आश्वासन

सेना प्रमुख मिन आंग लाइंग ने शनिवार को कहा कि वे ‘लोकतंत्र की रक्षा करेंगे’। लाइंग ने आश्वासन दिया कि देश में चुनाव करवाये जाएँगे और लोकतंत्र बहाल होगा।
उन्होंने कहा कि सेना को सत्ता की बागडोर इसलिए सम्हालनी पड़ी क्योंकि इससे पहले सत्ता में रही आंग सान सू ची ने ‘ग़ैर-क़ानूनी काम’ किए थे।
सैन्य प्रमुख ने सेना को गोली मारने के आदेश को लेकर कुछ नहीं कहा, हलांकि सुरक्षाबलों के दिये गए बयानों से ये आशंका है कि प्रदर्शकारियों पर गोली चलाने के आदेश सेना ने ही दिए हैं।

जनता बनाम सेना

रविवार का दिन म्यांमार के लोकतांत्रिक संघर्ष का सबसे ख़ूनी दिन बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 100 से ज़्यादा प्रदर्शकारियों की मौत हुई है, हलांकि सोशल मीडिया पर शेयर किये जा रहे ऑंकड़े इससे कही अधिक बताए जा रहे हैं।
इस बीच जनता ने एक साथ जुटकर लोकतंत्र के लिए अपनी जान गँवाने वाले सभी लोगों को याद किया है और पुरज़ोर तरीक़े से सेना को संदेश दिया है कि ये प्रदर्शन लोकतंत्र की बहाली के बाद ही थमेगा।
यंगून शहर में प्रदर्शन में शामिल एक महिला ने कहा- “उन्होंने हम पर कल, और उससे पहले भी गोलियाँ चलाई थीं। लेकिन मैं इसकी परवाह नहीं करती। विरोध प्रदर्शन के लिए घर छोड़ने से पहले ही मैंने अपने परिवार को गुडबाय कह दिया है, क्योंकि हो सकता है कि मैं कभी घर वापस ही ना लौटूँ। सेना पहले ही नाकाम हो चुकी है। हम सेना को ये बताना चाहते हैं कि हमें ख़ौफ़ नहीं है और हम पीछे नहीं हटने वाले।”
बता दें कि 1 फ़रवरी  म्यांमार की सत्ता और व्यवस्था पर गहरी चोट का दिन था। इस दिन म्यामांर की सेना ने सत्ता पर आसीन आंग सान सू ची को हिरासत में लेकर तख़्तापलट कर दिया। आशंकाओं के विपरीत इस तख़्तापलट का म्यांमार की जनता ने व्यापक स्तर पर विरोध करना शुरू किया जो अब तक जारी है। इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में म्यांमार की सर्वोच्च नेता रही आंग सान सू ची को रिहा करने की मांग उठ रही है।
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