April 11, 2021

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म्यांमार प्रदर्शन: अब तक 38 प्रदर्शनकारियों की मौत

 1 फ़रवरी  म्यांमार की सत्ता और व्यवस्था पर गहरी चोट का दिन था। इस दिन म्यामांर की सेना ने सत्ता पर आसीन आंग सान सू ची को हिरासत में लेकर तख़्तापलट कर दिया। आशंकाओं के विपरीत इस तख़्तापलट का म्यांमार की जनता ने व्यापक स्तर पर विरोध करना शुरू किया जो अब तक जारी है। इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में म्यांमार की सर्वोच्च नेता रही आंग सान सू ची को रिहा करने की मांग उठ रही है।
अब ये विरोध प्रदर्शन हिंसक मोड़ ले चुके हैं और 28 फ़रवरी का दिन म्यांमार प्रदर्शनों का सबसे घातक दिन था जहाँ पुलिस ने लोगों पर गोलियां चलायीं और जिसके कारण 18 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, हालाँकि सोशल मीडिया पर यह आँकड़ा इससे कही अधिक बताया जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने इसे तख़्तापलट के विरोध में की जा रही रैलियों का सबसे घातक दिन बताया है। म्यांमार के कई शहरों जैसे यंगून दवेई और मंडाले में भी लोगों के मारे जाने की ख़बरें आयीं। असली गोलियाँ, रबर की गोलियाँ, स्टन ग्रनेड का इस्तेमाल पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए किया जिसमें शिक्षकों का गुट भी शामिल था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स इन हमलों और झड़पों की पुष्टि करता है।

Photo Credit -Google
अब बीते रविवार को 21 प्रदर्शकारियों की मौत की ख़बर आ रही है। ये मौतें यंगून शहर में हुई हैं। हालाँकि ‘दी असिस्टेंट असोसिएशन फ़ॉर पोलिटिकल प्रिज़नर्स’ का दावा है कि लगभग 38 लोगों ने रविवार को अपनी जान गँवाई है। इन हिंसक झड़पों में म्यांमार के सुरक्षाबलों ने जहाँ एक ओर प्रदर्शकारियों पर गोलियाँ चलाईं वहीं दूसरी ओर प्रदर्शकारियों की ओर से डंडे और चाकू का इस्तेमाल हुआ।
बता दें कि सैन्य तख़्तापलट के चलते सेना के जनरल मिन ऑन्ग ह्लाइंग ने म्यामांर में एक साल का अपातकाल घोषित किया है। जिसके बाद से म्यांमार की जनता समेत गिरफ़्तारी से बचे नेताओं के गुट इसका पुरज़ोर विरोध कर रहे हैं।
इस तख़्तापलट पर विश्वभर के देशों ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है और म्यांमार की सेना के इस क़दम को ग़लत ठहराया है। एक वक्त में आंग सान सू ची से ख़फ़ा म्यांमार की जनता अब उन्हें लोकतंत्र का चेहरा मान रही है जिसपर यह पूरा आंदोलन खड़ा है।
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