April 11, 2021

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नंदीग्राम का संग्राम: क्यों है यहां जीत सबसे अहम?

पश्चिम बंगाल चुनाव में नंदीग्राम पिछले 14 साल से केंद्र में रहा है। ये वो इलाका है जिसने वाम दलों को बंगाल से उखाड़ फेंकने में अहम भूमिका निभाई और आज हालत ये है कि इस चुनाव में वाम दल मुख्य विपक्षी दल रहेंगे या नहीं इसपर भी कहीं बहस नहीं हो रही है।

मार्च 2007 को नंदीग्राम में चली गोली ने वामपंथी सरकार के पतन कि कहानी लिखनी शुरू कर दी थी।2011 के चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी को पहली बार कामयाबी मिली और फिर 2016 में दोबारा उन्हें सत्ता मिल गई।ममता मज़बूत हो रहीं थी और बंगाल में लेफ्ट की जगह उन्हें टक्कर देने की कोशिश करती बीजेपी दिख रही थी।

बीजेपी ने टीएमसी में सेंध लगानी शुरू कर दी थी। मुकुल रॉय जैसे विश्वस्त सहयोगी पार्टी से जा चुके थे। लेकिन राज्य स्टार के नेताओं में सबसे बड़ी टूट शुभेंदु अधिकारी के रूप में देखने को मिली।अधिकारी परिवार का टीएमसी में खास दबदबा था।शुभेंदु ममता बनर्जी के सबसे विश्वस्त में एक रहे हैं।यही वजह है नंदीग्राम में ममता को खुद कभी चुनाव लड़ने के बारे में पहले नहीं सोचना पड़ा।

2021 में जब शुभेंदु बीजेपी में शामिल हुए और फिर नंदीग्राम से बीजेपी का टिकट भी उन्हें मिला तो कैडर को सन्देश देने और ये बताने की अभी भी वो सबसे ज़्यादा मज़बूत हैं उन्होंने नंदीग्राम से लड़ने का फैसला किया। प्रचार के आखिरी दिन गृह मंत्री अमित शाह और मिथुन चक्रवर्ती ने रोड शो किये और दोनों में भारी भीड़ उमड़ी।वहीं ममता बनर्जी ने व्हील चेयर पर पदयात्रा कर ताक़त दिखाने की कोशिश की। आप इस सीट की अहमियत इससे समझ सकते हैं कि वोटिंग के दिन तक खुद ममता बनर्जी यहां रहेंगी। इसी तरह  शुभेंदु अधिकारी ने इस सीट पर ज़्यादा फोकस किया।

टीएमसी समझती है कि अगर यहां से पार्टी हारी तो पूरे राज्य में भविष्य में तृणमूल को परेशानी झेलनी पड़ सकती है। वहीं बीजेपी को लगता है कि अगर ममता यहां से हार गयीं तो राज्य में सीधा संदेश जाएगा कि बीजेपी अब बंगाल कि सबसे बड़ी ताक़त है। बैरहाल एक अप्रैल को जनता उम्मीदवारों के भाग्य को ईवीएम में बंद कर देंगे और 2 मई को नतीजे आएंगे और सबकी नज़र बंगाल की इस हॉट सीट के रिजल्ट पर रहेगी।

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