October 24, 2021

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NCRB में जारी किए नए आँकड़े, भारत में 2020 में 50 फ़ीसद बढ़े बाल विवाह के मामले

NCRB के हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में 2020 में बाल विवाह के मामलों में लगभग 50 फ़ीसद की वृद्धि दर्ज की गई है।

 

Reuters

 

विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब न केवल इन मामलों में वृद्धि हुई है, बल्कि इनकी रिपोर्टिंग में वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2020 के आंकड़ों के अनुसार, बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत कुल 785 मामले दर्ज किए गए हैं।

दर्ज किए गए मामलों की संख्या कर्नाटक में सबसे ज़्यादा 184 थी, इसके बाद असम में 138, पश्चिम बंगाल में 98, तमिलनाडु में 77 और तेलंगाना में 62 मामले थे।

 

ग़रीबी और स्कूल बंद होने से बाल विवाह में बढ़ोत्तरी

2019 कर्नाटक में अधिनियम के तहत 523 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2018 में 501 मामले दर्ज किए गए।

आंकड़ों के मुताबिक़ दर्ज हुए मामलों की संख्या 2018 में बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत था 501, 2017 में 395, 2016 में 326 और 2015 में 293 थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाल विवाह के मामलों में धीरे-धीरे वृद्धि का मतलब यह नहीं हो सकता है कि ऐसे मामलों में उछाल आया है, लेकिन इसकी आशंका है कि ऐसी घटनाओं को पहले से ज़्यादा दर्ज किया जा रहा है।

‘संजोग’ के संस्थापक सदस्य रूप सेन, जो भारतीय नेतृत्व फोरम अगेंस्ट ट्रैफिकिंग का एक हिस्सा हैं, ने कहा कि बाल विवाह में बढ़ोत्तरी के कई कारण हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, “यह बढ़ी हुई रिपोर्टिंग और उदाहरणों दोनों का मिश्रण है। किशोर लड़कियों के प्यार में पड़ने, भाग जाने और शादी करने की घटनाओं में वृद्धि हुई है जो बाल विवाह की संख्या में वृद्धि में भी योगदान देती है।”

 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

उन्होंने आगे कहा, “कई ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे संगठनों का कहना है कि बाल विवाह और उनकी मर्ज़ी से किए गए बाल विवाह में अंतर किया जाना चाहिए। ये घटनाएं बहुत अलग हैं। भागने के कई मामलों में, पॉक्सो लागू किया जाता है।”

कलकत्ता उच्च न्यायालय के अधिवक्ता कौशिक गुप्ता ने कहा सरकारी विभागों, डीएम, स्थानीय पंचायत बाल विवाद में वृद्धि को लेकर जागरूक हो गए हैं।

“मुझे नहीं लगता कि बाल विवाह में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है मुझे लगता है कि रिपोर्टिंग में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकारी विभाग, डीएम स्थानीय पंचायत जागरूक हो गए हैं, इसलिए रिपोर्टिंग में वृद्धि हुई है।”
और यह भी कहा कि आखिरकार इतने बाल विवाह को रोका गया है।”

 

बेरोज़गारी से गिर रही है बच्चों पर गाज

सेव द चिल्ड्रन में निदेशक कार्यक्रम और नीति अनिंदित रॉय चौधरी ने कहा कि कोविड -19 महामारी ने बाल विवाह में वृद्धि की है और यह कुछ ऐसा है जो कई समुदायों में देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा, “ग्रामीण और झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में काम करने वाले हमारे कर्मचारी हमें बताते हैं कि महामारी के दौरान बाल विवाह तेज़ी से बढ़ा है। जिन गांवों में कई वर्षों से एक भी बाल विवाह नहीं हुआ है, उन्हें अब माता-पिता को अपनी बेटियों की शादी रोकने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।”

उन्होंने कहा, “कई परिवारों ने अपनी आजीविका खो दी है और पूरे दिन घर पर बच्चों के साथ हैं जिससे, उन्हें लगता है कि उनके पास अपनी बेटी की शादी करने के अलावा कोई चारा नहीं है, ताकि घर में खाना खाने वालों की संख्या कम हो सके।”

उन्होंने आगे कहा कि बाल विवाह लड़कियों के लिए बेहद हानिकारक है और इसका मतलब केवल यह नहीं है कि वे अपनी शिक्षा जारी रखने में असमर्थ हैं और अपने जीवन की संभावनाओं को सीमित कर रहे हैं, बल्कि यह उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद ख़तरनाक है।

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