September 24, 2021

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वीगर मुसलमानों पर आई अमेरिका की नई रिपोर्ट, चीन के साथ पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की मिलीभगत का हुआ ख़ुलासा

अमेरिका स्थित एक रिसर्च एंड एडवोकेसी ग्रुप ने वीगर मुसलमानों के चीन के अंतरराष्ट्रीय दमन में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की मिलीभगत का दस्तावेजीकरण करते हुए एक नई रिपोर्ट जारी की है।

 

 

वीगर ह्यूमन राइट्स प्रोजेक्ट (UHRP) और ऑक्सस सोसाइटी फ़ॉर सेंट्रल एशियन अफ़ेयर्स की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में वीगर समुदायों के ख़िलाफ़ चीनी सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न तरीकों की व्याख्या की गई है।

‘नेट्स कास्ट फ्रॉम द अर्थ टू द स्काई: चाइनाज़ हंट फ़ॉर पाकिस्तान्स वीगर’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में, शोधकर्ताओं ने सरकारी दस्तावेज़ों और ह्यूमन राइट्स रिपोर्ट के अलावा पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और तुर्की में वीगर कार्यकर्ताओं और शरणार्थियों के साथ साक्षात्कार कर, चीन के अंतरराष्ट्रीय दमन के मामलों को इकट्ठा किया गया है।

यूएचआरपी के कार्यकारी निदेशक ओमर कनाट ने कहा कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान चीन के ग्राहक देश बन रहे हैं। “चीनी अधिकारियों के इशारे पर, इस्लामाबाद और काबुल कमज़ोंर वीगरों के उत्पीड़न, हिरासत और निर्वासन में लगे हुए हैं। कुछ लक्षित विगरों को चीन में प्रताड़ित किया गया है और उन्हें मार दिया गया है, जबकि अन्य ने अपने परिवारों के टूटने जैसा भारी नुकसान भी झेला है। चीन की आर्थिक उदारता वीगरों के ख़िलाफ़ हिंसा में हर तरह की मिलीभगत कर सकती है।”

ऑक्सस सोसाइटी फ़ॉर सेंट्रल में अनुसंधान निदेशक ब्रैडली जार्डाइन ने कहा, “यह ज़रूरी है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय यह स्वीकार करे कि इमरान खान न केवल वीगरों की दुर्दशा पर चुप रहे हैं, बल्कि उनकी सरकार चीन की कार्रवाई में पूरी तरह से शामिल भी है।”
उन्होंने आगे कहा, “जैसा ही अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने की तैयारी करता है, वीगर अफ़ग़ान नागरिकों और दीर्घकालिक निवासियों को समान रूप से पाकिस्तान समर्थित तालिबान आंदोलन के नेतृत्व में चीन के लिए बढ़ते उत्पीड़न और यहां तक ​​​​कि प्रत्यर्पण के ख़तरे का सामना करना पड़ता है।

रिपोर्ट ने यह सुझाव भी दिया है कि सरकारों को वीगरों के पुर्नवास के लिए कोटा बढ़ाना चाहिए। इनके अलावा UNHCR को इसकी पड़ताल भी करनी चाहिए कि चीन में कथित शैक्षणिक कैम्पों की सच्चाई क्या है और कैसे इस्लामाबाद में यूएनएचसीआर कार्यालय द्वारा वीगर शरणार्थियों को शरण सेवाओं से वंचित किया जा रहा है।

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