October 26, 2021

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नोएडा प्राधिकरण ने संपत्ति के पुनर्विक्रय पर ट्रांसफ़र फ़ीस किया आधा, घर ख़रीदारों में अनिश्चितता के बीच उत्साह

नोएडा प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश शहर में संपत्ति के दोबारा बेचे जाने पर लगाए गए कर को आधा कर दिया है जो माना जा रहा है कि एक ऐसा कदम है जो बाज़ार की धीमी रफ़्तार के बीच लोगों का विश्वास बांध सकता है।

 

Credit- Money control

 

24 सितंबर को एक बैठक के दौरान प्राधिकरण ने मेमोरेंडम (टीएम) फ़ीस के ट्रांसफ़र या प्लाट के साथ-साथ फ्लैटों पर ट्रांसफ़र फ़ीस को 5 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया।

प्राधिकरण प्लॉट या फ्लैट के दोबारा बिकने पर पंजीकरण के समय एक ट्रांसफ़र फ़ीस लेता है। प्राधिकरण ने एक बयान में कहा कि नए शुल्क 2011 के बाद आवंटित संपत्तियों पर लागू होंगे।

शहर के निवासी, जिसमें वाणिज्यिक और आवासीय संपत्तियां हैं, इस निर्णय से उत्साहित हैं।

राजीव सिंह, अध्यक्ष, नोएडा फ़ेडरेशन ऑफ़ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन, का कहना है, “यह यूपी सरकार की एक सराहनीय पहल है। इस फ़ैसले से सैकड़ों घर ख़रीदारों में खुशी है। अगला कदम 50,000 से अधिक लंबित रजिस्ट्रियों के पूरे बैकलॉग को साफ़ करना होना चाहिए ताकि कम ट्रांसफर शुल्क का लाभ उन होमबॉयर्स को भी दिया जा सके।”

सलाहकारों ने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है लेकिन अभी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है। एनारॉक ग्रुप के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार ने कहा, “हालांकि यह समग्र भावना को बेहतर बनाने में मदद करेगा और संपत्ति के मालिकों को अपनी संपत्ति बेचने में मदद करेगा, लेकिन यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि अभी बहुत कुछ किया जा सकता है।”

अब भी ख़रीदारों में अनिश्चितता

हालांकि अभी ये साफ़ नहीं हुआ है कि ये नए नियम कब तक लागू होंगे। इसे लेकर ख़रीदारों में अनिश्चितता है।

ऐसे ही एक ख़रीदार विशाल कुमार अपनी स्थिति के बारे में बताते हैं, “मुद्दा हमारे जैसे खरीदार के लिए है जो एक एनआरआई है और एनआरआई से संपत्ति खरीदने के लिए अभी भी नए टीएम के लागू होने की तारीख में कोई स्पष्टता नहीं है। मैं 27 सितंबर को प्राधिकरण के पास इस उम्मीद में गया था कि नया टीएम अब लागू होगा लेकिन मुझे बताया गया कि प्राधिकरण के पास इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और टीएम पुरानी दरों के आधार पर किया जाएगा।उन्होंने आगे कहा, “यदि मैं पुरानी दरों पर टीएम का भुगतान करता हूं तो मुझे केवल टीएम शुल्क के रूप में 6.5 लाख का भुगतान करना होगा, जबकि नई दरों के अनुसार टीएम आधा होगा और 3.25 लाख होना चाहिए।”

विशाल कहते हैं कि उन्हें भविष्य की इस अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है, “मुद्दा यह है कि अगर मैं पुरानी दरों के अनुसार टीएम का भुगतान करता हूं तो अंतर वापस नहीं किया जाएगा और अगर मैं नए टीएम का इंतज़ार करता हूं तो मैं 3.25 लाख बचा सकता हूं लेकिन यह कब तक लागू होगा, इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है।”

उन्होंने आगे जोड़ा, “और यह देरी हमारे जैसे निवासी के लिए एक बुरे सपने जैसा है जो एनआरआई और विक्रेता के रूप में ख़रीदते और बेचते हैं और अधिक इंतज़ार करने के लिए सहमत नहीं होंगे। उस स्थिति में मुझे पुरानी दरों में टीएम करना होगा जो हमारे लिए कुल नुक़सान है और यदि ऐसा है तो बोर्ड बैठक में इसकी घोषणा करने का क्या फ़ायदा है।’

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