नोएडा में आज से सरफेस पार्किंग फ्री, 30 नवंबर को पुराने टेंडर समाप्त

by Priya Pandey
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नोएडा की 54 सरफेस पार्किंग में फ्री पार्किंग होगी। दरसअल, व्यवस्थित पार्किंग के नाम पर शहर में संचालित होने वाली पार्किंग का टेंडर 30 नवंबर को खत्म हो गया है। ऐसे में नई एजेंसी का चयन न होने तक वाहनों चालकों से पार्किंग का कोई नहीं लिया जाएगा। पार्किंग फीस वसूलने पर एफआईआर की जाएगी।
नोएडा प्राधिकरण के मुताबिक, पार्किंग ऑनर रिस्क पर होगी। बुधवार को नोएडा ट्रैफिक सेल ने ठेकेदारों को आदेश जारी कर दिया है। साथ ही ठेकेदारों को चेतावनी दी है कि यदि कोई ठेकेदार एक दिसंबर से सरफेस पार्किंग में पर्ची काटते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी।सरफेस पार्किंग टेंडर समाप्त होने के बाद ठेकेदार कृष्ण गोपाल वरिष्ठ, राजेंद्र सिंह का ठेका संभालने वाले अभय सिंह ने नोएडा ट्रैफिक सेल वरिष्ठ प्रबंधक एएस शर्मा को लिखित पत्र के जरिये 54 सरफेस पार्किंग हैंड ओवर लेने को कहा, लेकिन नोएडा ट्रैफिक सेल के वरिष्ठ प्रबंधक ने हैंडओवर लेने से साफ इनकार कर दिया है।

ऐसे में उन शहरवासियों के वाहनों की सुरक्षा खतरे में आ गई है, जो मासिक पास के जरिये अपने वाहनों को सरफेस पार्किंग में खड़ा कर रहे थे। ऐसे वाहनों की संख्या 54 पार्किंग में हजारों में है।

लिटिगेशन में जाने को तैयार मामला
बाकाया राशि को लेकर सरफेस पार्किंग ठेकेदार कृष्ण गोपाल वरिष्ठ व अभय सिंह ने एनटीसी अधिकारियों से कहा कि उनके ऊपर कोई भी प्राधिकरण का बकाया नहीं है, क्योंकि प्रतिमाह करीब एक करोड़ रुपये प्राधिकरण के खाते में जमा कराया गया है।

प्राधिकरण ने कोरोना काल में छूट नहीं दी, उल्टा टेंडर नियम शर्त के उलट बकाया पर अनाप शनाप ब्याज लगाकर रकम को बढ़ाया गया है। इसमें पांच-पांच करोड़ रुपये ब्याज की रकम के शामिल है। जबकि साधारण ब्याज के साथ बकाया राशि ली जानी थी। अब यह मामला लिटिगेशन के जरिये सुलझेगा। साढ़े नौ करेाड़ रुपये की सिक्योरिटी भी जमा प्राधिकरण में जमा है, लेकिन उसे भी वापस नहीं किया जा रहा।

न समय पर वसूली न नया टेंडर
नोएडा ट्रैफिक सेल अधिकारियों कार्य प्रणाली पर सवाल निशान लग गया है कि आखिर समय रहते नया टेंडर सरफेस पार्किंग का क्यों नहीं जारी हुआ। जबकि एनटीसी प्रभारी को भलीभांति पता था कि सरफेस पार्किंग का टेंडर 30 नवंबर को समाप्त होने वाला है। क्या ठेका समाप्त होने के बाद इन्हीं ठेकेदारों को समय विस्तार दिया जाना था, क्योंकि दो वर्ष में बकाया राशि को भी पूरा नहीं जमा कराया गया।

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