October 24, 2021

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिका को दी नसीहत, कहा तालिबान को मान्यता नहीं दी तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि अगर अमेरिका तालिबान के साथ बातचीत नहीं करता है और उसकी मान्यता पर सकारात्मक रुख अपनाता है तो इससे क्षेत्र में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

 

Credit- Reuters

 

पाकिस्तान के दुन्या न्यूज़ ने शनिवार को बताया कि इमरान खान ने शुक्रवार को रूसी मीडिया आउटलेट के साथ एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि अफ़ग़ानिस्तान वर्तमान में पूरे क्षेत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि देश एक ऐतिहासिक दोराहे पर खड़ा है।

जब उनसे अमेरिका के ख़िलाफ़ तालिबान को पाकिस्तान की सहायता के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान ने तालिबान को अमेरिका के ख़िलाफ़ जीतने में मदद की, तो इसका मतलब है कि पाकिस्तान अमेरिका और पूरे यूरोपीय लोगों से ज़्यादा मज़बूत है और इतना मज़बूत है कि वह एक 60 हज़ार लड़कों का मिलिशिया बनाने में सक्षम है और हल्के हथियारों से लैस होकर उसने 3 लाख लड़कों की मज़बूत सेना को हरा दिया।”

उन्होंने यह भी कहा, “अफ़ग़ान लोग बाहरी ताकतों के ख़िलाफ़ युद्ध को जिहाद की तरह मानते हैं और तालिबान ने पिछ्ले 20 वर्षों में बहुत कुछ सीखा है।”

 

“किराए को बंदूक”

बुधवार को इमरान खान ने कहा था कि अमेरिकी युद्ध आतंकवाद के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के लिए “विनाशकारी” था क्योंकि वाशिंगटन ने इस्लामाबाद को अफ़ग़ानिस्तान में अपनी 20 साल मौजूदगी को दौरान “किराए की बंदूक” की तरह इस्तेमाल किया था।
“हम (पाकिस्तान) किराए की बंदूक की तरह थे।”

खान ने सीएनएन के साथ एक साक्षात्कार में कहा, “हमें उन्हें (अमेरिका को) अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध जीताना था, जो हम कभी नहीं कर सके।”

बता दें कि सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान से सैन्य वापसी के बाद अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों का पुनर्मूल्यांकन करेगा।

ग़ौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा पर्याप्त सबूत पेश करने के बावजूद, इमरान खान ने सीएनएन साक्षात्कार में इन आरोपों से इनकार किया कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देता है।

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