April 11, 2021

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एनसीआर राजस्थान और अन्य राज्यों के पेरेंट्स एसोसिएशन ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन पर किया प्रदर्शन

जैसा कि आप सभी जानते है कि देश मे आई कोरोना वैश्विक महामारी के कारण शिक्षा का 2020/21 का पूरा सत्र महामारी की भेंट चढ़ गया , देश के स्कूल खुले नहीं लेकिन निजी स्कूल विद्यार्थियों पर परीक्षण कर ऑनलाइन क्लास के नाम पर पूरी फ़ीस वसूली करने में लग गये।  यह लूट बेइंतहा हो, इसके लिये छोटे से छोटे बच्चे की भी ऑनलाइन क्लास हुई। अभिभावकों को अपने बच्चों को मोबाइल / लैपटॉप /कंप्यूटर की स्क्रीन से दूर रहने का सबक सिखाने वाले स्कूल अब उन्हें ऑनलाइन क्लास दिलाने के लिये प्रेरित करने लगे। नृत्य से लेकर संगीत और घुड़सवारी से लेकर तैराकी, सभी क्लास बेबाकी से ऑनलाइन चल पड़ी। इसका अभिभावकों पर मोटे मोटे इंटरनेट कनेक्शन और लैपटॉप का अतिरिक्त बोझ पड़ा और पढ़ने वाले बच्चे चश्मों के बोझ तले झाँकने लगे। निजी स्कूल के मालिक बहुत खुश थे, इसलिए नहीं कि वह बच्चों से जुड़ पाये, यह काम तो उनके स्कूल में कार्यरत कर्मचारियों का है, स्कूल मालिक इसीलिए खुश थे, कि अब वो ऑनलाइन क्लास चला फ़ीस पूरी लेने का दावा करेंगे और उनका मुनाफ़ा इस वैश्विक महामारी में भी कम न होगा।

सभी अभिभावक सरकार की और टिकटिकी लगाये बैठे थे कि सीधे न सही, अपनी नियामिक संस्थाओं द्वारा, शिक्षा विभाग द्वारा, फीस रेगुलेशन कमेटियों द्वारा, या स्वयं प्रशासन या साशन आगे बढ़, इन बेलगाम निजी शैक्षिक संस्थाओ को मनमानी करने से रोकेगी और ऑन लाइन क्लास के अनुसार फीस निर्धारण कर पेरेंट्स को राहत देगी लेकिन सरकार तो पूरे कोरोना काल में इस तरफ से आँख और कान बंद कर बैठ गयी और निजी स्कूलो को खुलकर सरक्षंण दिया गया और अभिभावको की जायज मागो को दर किनार कर दिया गया।

 

देश के अनेको राज्यो के अभिभावको ने अपने अपने राज्यो की सरकारों को आंदोलन , ज्ञापन ,ट्वीटर और वीडियो के माध्य्म से पीड़ा से अवगत कराया लेकिन राज्य सरकारे निजी स्कूलों के दबाब में आकर चुप्पी साधे बैठी रही है इसी को देखते हुये एनसीआर और अन्य राज्यों  की पेटेंट्स एसोसिएशन  ने माननीय प्रधानमंत्री जी तक अभिभावको की पीड़ा पहुचाने के लिये भारी संख्या में उपस्थित अभिभावको के साथ मिलकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री जी से मागो पर निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।

1 – एक देश, एक शिक्षा, एक पाठ्यक्रम लागू किया जाए एवम देश के सभी स्कूलो में एन.सी.ई.आर.टी का पाठ्यक्रम एवं किताबों को सख्ती से लागू करने का आदेश जारी किया जाए।

2- कोरोना वैश्विक महामारी के कारण देश मे लगे तीन महीने के सम्पूर्ण लॉक डाउन समय ( अप्रैल ,मई जून ) की फीस माफी का आदेश राज्य सरकारो को जारी किया जाय

3 – कोरोना वैश्विक महामारी के कारण  शिक्षा सत्र 2020/21 में बंद रहे निजी स्कूलो की फीस का निर्धारण ऑन लाइन क्लास के अनुसार निर्धारित करने का आदेश राज्य सरकारो को जारी किया जाये।

4- निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा सत्र 2021/22 में फीस वृद्धि करने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया जाए। 

5-  आर .टी. ई एक्ट का निजी स्कूलों द्वारा पालन कराने के लिए प्रत्येक राज्य में कमेटी का गठन किया जाए

6 – देश के सरकारी विद्यालयो को भी क्षेत्रीय बोर्ड की जगह सी.बी.एस.ई या ऐसे अन्य किसी राष्ट्रीय बोर्ड से पंजीकृत कर तेजी से जीर्णोद्धार करके बच्चों के लिये मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाए।

7- राज्य सरकारो को निजी स्कूलों की पिछले 10 साल की बेलैंस शीट जांच के आदेश जारी किये जायें और जांच में पाये जाने वाले सरप्लस फण्ड से सरकारी स्कूलों का कायाकल्प किया जाए

8- देश के सभी निजी स्कूलों का संचालन एवं फ़ीस आदि निर्धारण एवं अन्य मानकों को सुचारू रूप से लागू करने के लिये नियम क़ानून हों और इनको लागू कराने के जिम्मेदारी वाले विभाग पर प्रवर्तन निदेशालय कड़ी निगरानी हो।

9 – आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसी भी अभिभावक द्वारा फीस ना दे पाने की स्थिति में किसी भी निजी स्कूल द्वारा दसवीं और बारहवीं का एडमिट कार्ड ना रोकने का आदेश जारी किया जाए

10- कक्षा एक से आठ तक के बच्चो को नो डिटेंशन पालिसी के तहत बिना परीक्षा के अगली कक्षा में प्रमोट करने का आदेश सभी राज्यो की सरकारों को जारी किया जाए

यह पदर्शन इस शपथ के साथ पूर्ण हुआ कि अभिभावक विद्यार्थियों के हितों के लिये किसी भी हद तक जाकर शिक्षा माफियाओं को रोकेंगे। अभिभावकों ने यह प्रण भी लिया कि वह सरकार को मजबूर करेंगे कि ऐसी व्यवस्था की जाये जिससे शिक्षा का व्यवसाईकरण न हो और यह बिकाऊ उत्पाद बन कर न रह जाये।

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