April 11, 2021

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महिलाओं के प्रीति पूर्वाग्रह से भरे इमरान ख़ान के बयान पर लोगों का आक्रोश

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने महिलाओं के प्रति एक ऐसा बयान दे दिया जिससे न केवल उनकी सोच पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि उन्हें माफ़ी के क़ाबिल भी नहीं कहा जा रहा है। दअसल उन्होंने रेप को लेकर एक विवादित बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि रेप और यौन दुर्व्यवहार के लिए बढ़ती अश्लीलता ज़िम्मेदार है। वहाँ की मीडिया ने इसकी कड़ी आलोचना की है और इसे ख़तरनाक और महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया है।

Credit- The Indian Express
4 अप्रैल को एक टेलीथॉन के दौरान एक कॉलर ने इमरान ख़ान से पूछा कि रेप और यौन हिंसा के बढ़ते मामलों को लेकर सरकार की क्या योजना है, इसके जवाब में उन्होंने कहा था कि समाज को ख़ुद को फ़हश (अश्लीलता) से बचाना होगा।
दैनिक अख़बार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक़ इमरान ने कहा, “आज जिस समाज में फ़हश (अश्लीलता) बढ़ते हैं, वहाँ कुछ तो इसका असर होगा न।”
उन्होंने आगे कहा,”हमारे दीन में क्यों मना किया गया है? ये सारा जो पर्दा का कॉन्सेप्ट है, ये क्या है? कि टेम्पटेशन न हो मशारे में। हर इंसान में विल पावर नहीं होता।”
यानी यही कारण है कि हमारे धर्म में अपने शरीर को ढकने पर ज़ोर डाला जाता है और लज्जा क़ायम रखी जाती है ताकि समाज प्रलोभन को काबू में रखे। सभी के पास ख़ुद को कंट्रोल करने की ताक़त नहीं होती।

‘पूर्वाग्रह से ग्रसित बयान’

पाकिस्तान के कई पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इमरान के इस बयान को पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया है।
पत्रकार फ़ैज़ फ़रीद ने ट्रिब्यून में लिखा कि ऐसे बयान एक ख़तरनाक़ मिसाल क़ायम करते हैं और इस ओर इशारा करते हैं कि महिलाएँ अपने साथ होने वाले दुर्व्यवहार के लिए ज़िम्मेदार हैं और वे ऐसा चाहती हैं।
उन्होंने लिखा, “इस तरह के बयान रेप के साथ ही इसमें निहित ताक़त के दुरुपयोग की अनदेखी करते हैं और स्पष्ट तौर पर इस राय को रखते हैं कि ‘महिलाएँ ही ऐसा चाहती’ हैं।”
डॉन अख़बार ने इमरान ख़ान के ख़यालों को, “चौंकाने वाला असंवेदनशील और देश में महिलाओं के आंदोलन के लिए हानिकारक बताया।”
उसने लिखा, “महिला ने क्या कपड़े पहने हैं इसका उसके ख़िलाफ़ यौन हिंसा से जुड़ाव का मिथक बहुत पहले ही तोड़ा जा चुका है, लेकिन ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री अब भी ऐसे विचारों को पनाह देते हैं।”
बता दें कि इमरान ख़ान के इस बयान का देश के कई बड़े संगठनों ने विरोध किया है।

पाकिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा पर चर्चा

पाकिस्तान में महिलाओं के रेप और यौन हिंसा को लेकर लंबे समय से चर्चा रही है।
2016 में तत्कालीन पंजाब के गवर्नर चौधरी सरवर ने बताया था कि, “रेप के मामलों में पाकिस्तान दुनिया के 10 सबसे ख़राब देशों में शुमार है।”
गत वर्ष 9 दिसंबर 2020 को लाहौर हाइवे के पास एक महिला का उसके बच्चों के सामने बालात्कार हुआ था जिसके बाद पाकिस्तान के लोगों में बेहद ग़ुस्सा देखा गया। उस समय से ही महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल तेज़ी से उठने लगे।
Credit- Tribune
इस मामले के सामने आने पर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए जिसके बाद बीते वर्ष दिसंबर में रेप को लेकर एक नया क़ानून पारित किया गया। इसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट सुनवाई और कठोर सज़ा का प्रावधान किया गया।
अब इमरान ख़ान के रेप सम्बंधी इस बयान के बाद सरकार की नीतियों पर सवालिया निशान लगता है।
कुछ संगठनों ने अपने बयान में कहा कि “दुर्भाग्य से इमरान ख़ान के बयान ने देश में महिलाओं की स्थिति को और भी ख़तरनाक बना दिया है।”

बॉलीवुड और पश्चिमी सभ्यता का दोष

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने बढ़ते रेप के मामलों का ज़िम्मेदार बॉलीवुड और पश्चिमी सभ्यता को माना है जिसे लेकर उनकी आलोचना हो रही है।
डॉन ने इमरान ख़ान का बयान छापा, “दिल्ली को रेप कैपिटल कहते हैं, यूरोप में अश्लीलता ने वहाँ परिवार व्यवस्था को तबाह कर दिया है। लिहाज़ा, पाकिस्तान के लोगों को अश्लीलता से उबरने में सरकार की मदद करनी चाहिए।” जाने माने पत्रकार ज़ाहिद हुसैन ने इमरान ख़ान के इन बयानों को ‘माफ़ी के लायक नहीं’ बताते हुए कहा कि यह “उस पिछड़ी हुई मानसिकता को दर्शाता है जो महिलाओं के प्रति यौन हिंसा और रेप को पश्चिमी और बॉलीवुड संस्कृति के बढ़ते प्रभाव को प्रकट करना मानता है।”

सोशल मीडिया का ग़ुस्सा

पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर इमरान ख़ान के उस बयान की जमकर आलोचना हो रही है। न केवल आम लोग बल्कि पत्रकार भी इसपर मुखर हुए हैं।
ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट साइमा मोहसीन ने इमरान ख़ान के इस बयान पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए अपनी नाराज़गी व्यक्त की है। उन्होंने लिखा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान में क़ानून व्यवस्था की कोई बात नहीं की गई।
मानवाधिकार कार्यकर्ता और राजनेता जिबरान नासिर ने भी ट्वीट कर कहा, “रेप शक्ति असंतुलन का नतीजा है, न कि प्रलोभन का। बलात्कारी ख़ुद को नियंत्रित कर लेता है जब उसे इसके परिणाम में मिलने वाले कठोर दंड का पता हो और अगर उन्हें इसका भय न हो तो वो एक छोटे बच्चे का भी रेप करते हैं।”
इमरान ख़ान के इस बयान से ज़ाहिर तौर पर पूर्वाग्रह से ग्रसित होने की बात सामने आती है। बालात्कार जैसे मामलों में महिलाओं को ही दोषी ठहराना एक दकियानूसी सोच का हिस्सा है जिसे हर देश और समाज को ठुकराना चाहिए।
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