Wednesday, September 28, 2022

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प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकियों पर साधा निशाना, कहा दहशतगर्दी के दम पर मानवता को दबा नहीं सकते

by MotherlandPost Desk
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर की 83 करोड़ रुपए की चार परियोजनाओं का उद्घाटन और मुख्य मंदिर के पास 30 करोड़ रुपए में बनने वाले पार्वतीजी मंदिर का शिलान्यास किया।

Credit ANI

साथी ही प्रधानमंत्री ने आतंकियों पर निशाना साधते हुए कहा कि दहशतगर्दी के दम पर साम्राज्य खड़ा करने वाले मानवता को ज्यादा दिन दबाकर नहीं रख सकते।

बता दें उद्घाटन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह और लालकृष्ण आडवाणी वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े थे।

भगवान भोलेनाथ के चरणों का अनुभव कर रहा हूँ

पीएम मोदी ने ‘जय सोमनाथ’ के घोष के साथ लोकार्पण कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि, “मैं भले ही वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़ा हूं, पर मन से खुद के भगवान सोमनाथ के चरणों में होने का अनुभव कर रहा हूं। ये मेरा सौभाग्य ही है कि इस पुण्य स्थल की सेवा करने का मुझे अवसर मिला है।”

सत्य को असत्य से हराया नहीं जा सकता

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ के बहाने आतंकियों पर निशाना साधते हुए कहा कि आज भी विश्व के सामने आह्वान कर रहा है कि सत्य को असत्य से हराया नहीं जा सकता है। आस्था को आतंक से कुचला नहीं जा सकता है। सैकड़ों सालों के इतिहास में इस मंदिर को कितनी ही बार तोड़ा गया। मूर्तियों को खंडित किया गया, इसका अस्तित्व मिटाने की कोशिश की गई, लेकिन इसे जितनी बार गिराया गया, वह उतनी ही बार उठ खड़ा हुआ।

राजेंद्र प्रसाद और सरदार पटेल को किया नमन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, “हम सभी जानते हैं कि सोमनाथ मंदिर के पुननिर्माण से लेकर भव्य विकास की यात्रा केवल कुछ सालों या दशकों का परिणाम नहीं है। ये सदियों की दृढ़ इच्छाशक्ति और वैचारिक निरंतरता का परिणाम है। राजेंद्र प्रसाद, सरदार पटेल जैसे लोगों ने आजादी के बाद भी इस अभियान के लिए कठिनाइयां सहीं। हमारी सोच होनी चाहिए कि इतिहास से सीखकर वर्तमान को सुधारने की और नया भविष्य बनाने की।”

भारत छोड़ो आंदोलन का किया ज़िक्र

प्रधानमंत्री मोदी भारत छोड़ो आंदोलन का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब मैं भारत जोड़ो आंदोलन की बात करता हूं तो उसका भाव केवल भौगोलिक और वैचारिक जुड़ाव तक सीमित नहीं है। ये हमें हमारे अतीत से जोड़ने का भी मौका है। सोमनाथ का निर्माण तब पूरा होगा जब इसकी नींव पर समृद्ध और संपन्न भारत का भव्य भवन तैयार हो चुका होगा। उसका प्रतीक सोमनाथ मंदिर होगा। हमारे प्रथम राष्ट्रपति का ये सपना हम सभी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है। साथियों हमारे लिए इतिहास और आस्था का मूलभाव है सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास और सबका प्रयास।

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