October 24, 2021

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PMO ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, किसी RTI या “राज्य” के दायरे में नहीं आता पीएम केयर्स फंड

केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया है कि पीएम केयर्स फंड को न तो सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे में “सार्वजनिक प्राधिकरण” के रूप में लाया जा सकता है, और न ही इसे एक “राज्य” के रूप में सूचीबद्ध किया जा सकता है।

 

 

केंद्र ने प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति निधि (पीएम केयर्स) में राहत की कानूनी स्थिति जानने की मांग करने वाली याचिकाओं के जवाब में, मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और ज्योति सिंह की पीठ को एक हलफ़नामे में बताया कि फंड की स्थापना एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में की गई थी और उसे भारत के संविधान द्वारा या उसके तहत या संसद या किसी राज्य विधायिका द्वारा बनाए गए किसी कानून द्वारा नहीं बनाया गया है।

PMO के इस हलफ़नामे में कहा गया है कि यह किसी राज्य या केंद्र सरकार से नहीं बल्कि चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा हुआ है। इस फंड से आने वाली राशि भारत सरकार की किसी संचित निधि में नहीं जाती है।

 

याचिका में क्या है?

बता दें कि इस फ़ंड को लेकर वकील सम्यक गंगवाल ने दिल्ली हाइकोर्ट में याचिका दायर की है और माँग की है कि इस फंड को राज्य का घोषित किया जाए और साथ ही इसे पारदर्शिता बनाए रखने के लिए RTI के दायरे में लाया जाए।

इसके बाद PMO में अवर सचिव प्रदीप श्रीवास्तव ने इस फंड को लेकर बताया कि कि ट्रस्ट पूरी पारदर्शिता के साथ काम करता है और इसके फंड का ऑडिट एक ऑडिटर द्वारा किया जाता है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि कोष में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस ट्रस्ट को मिले धन और उसका सारा विवरण आधिकारिक वेबसाइट पर डाला जाता है।

उन्होंने कहा, ‘ट्रस्ट को जो भी दान मिले वो ऑनलाइन, चेक या फिर डिमांड ड्राफ्ट के ज़रिए मिले हैं। ट्रस्ट इस फंड के सभी ख़र्चों का ब्यौरा अपनी वेबसाइट पर अपडेट करता है।’

”Gov’ का इस्तेमाल करने से रोका जाए’

गंगवाल द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया है कि ‘प्रधानमंत्री द्वारा मार्च 2020 में कोविड -19 महामारी के मद्देनज़र देश के नागरिकों को सहायता प्रदान करने के एक बड़े उद्देश्य के लिए PM-CARES फंड का गठन किया गया था और इसे अधिक मात्रा में दान मिला।’

दायर याचिका में ये भी कहा गया है कि ट्रस्ट के संबंध में दिसंबर 2020 PM cares fund की वेबसाइट पर जानकारी दी गई थी कि इसे संविधान या किसी क़ानून के तहत नहीं बनाया गया है। गंगवाल की याचिका में ये भी शामिल है कि PM cares fund को अपनी वेबसाइट के डोमेन में ‘gov’ का उपयोग करने से रोका जाना चाहिए।

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