April 11, 2021

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ढाका में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जीवन के पहले आन्दोलनों में शामिल था बांग्लादेश की आज़ादी के लिए संघर्ष

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर बांग्लादेश की राजधानी ढाका पहुँचे। यह अवसर बांग्लादेश की आज़ादी के 50वें वर्ष की स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में शामिल होने का था। यहाँ प्रधनमंत्री शेख़ हसीना और राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल हामिद के साथ अन्य को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक सुखद संयोग है कि बांग्लादेश की आज़ादी के 50 वर्ष और भारत की आज़ादी के 75 वर्ष एक साथ पूरे हो रहे हैं। हम दोनों ही देशों के लिए आने वाले 25 वर्ष बेहद महत्वपूर्ण हैं।
संबोधन की मुख्य बातें
इस संबोधन में उन्होंने कहा कि मैं आज बांग्लादेश के लाखों नागरिकों को याद कर रहा हूँ जिन्होंने आज़ादी के संघर्ष में अपना जीवन तक दाँव पर लगा दिया। उन्होंने इस संघर्ष से ख़ुदको जोड़ते हुए कहा कि बांग्लादेश की आज़ादी के लिए आंदोलन मेरे जीवन के सबसे पहले आंदोलनों में शामिल था।
मेरी उम्र 20-22 साल की थी जब मैंने और मेरे कई साथियों ने बांग्लादेश की लड़ाई के लिए सत्याग्रह किया था। 
बांग्लादेश की आज़ादी के लिए जितनी तड़प इधर(बांग्लादेश) थी, उतनी ही तड़प उधर(भारत) भी थी।
पाकिस्तान की सेना ने बांग्लादेश में जो जघन्य अपराध और अत्याचार किया है वो तस्वीरें कई दिनों तक सोने नहीं देती थीं। एक निरंकुश सरकार अपने ही नागरिकों का जनसंहार कर रही थी, उनकी भाषा, आवाज़ और पहचान को कुचल रही थी।
बांग्लादेश और हम भारतीयों के लिए आशा की किरण थे ‘बंगबंधु’ शेख़ मुजीबुर्रहमान। उनके हौसले और नेतृत्व ने सिद्ध किया कि कोई भी ताक़त बांग्लादेश को ग़ुलाम बनाकर नहीं रख सकती।
मैं आज भारतीय सेना के उन वीरों को भी नमन करता हूँ जो कठिन समय में बांग्लादेश के भाइयों-बहनों के साथ खड़े हुए थे और जिन्होंने आज़ाद बांग्लादेश के सपना साकार करने करमें में अपनी अविस्मरणीय भूमिका निभाई।
मैं राष्ट्रपति अब्दुल हामिद जी और प्रधानमंत्री शेख़ हसीना जी के साथ बांग्लादेश के नागरिकों का आभार प्रकट करता हूँ कि उन्होंने अपने इस गौरवशाली दिन और उत्सव का मुझे भागीदार बनाया। साथ ही ‘बंगबंधु’ शेख़ मुजीबुर्रहमान को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
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