October 24, 2021

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धांधली के आरोपों से घिरी पुतिन की पार्टी एक बार फिर बढ़ा रही है जीत की ओर क़दम

रूस के संसदीय चुनाव में क्रेमलिन व्लादिमीर पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया एक बार फिर बड़ी जीत हासिल करती नज़र आ रही है। हालांकि इस बार पुतिन की पार्टी के वोट शेयर में थोड़ी कमीं भी देखी जा रही है।

 

क्रेमलिन व्लादिमीर पुतिन/REUTERS

 

बता दें कि बीती शाम यानी रविवार को सत्ताधारी यूनाइटेड रशिया में चुनाव ख़त्म होने से पहले ही जीत का दावा कर दिया था। ग़ौरतलब है कि इस चुनाव में पुतिन के आलोचकों को जिनमें एलेक्सी नवलनी भी शामिल हैं, को चुनाव में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था।

ऐसे में जो उम्मीदवार पुतिन के विरोध में खड़े हुए, उनकी भी कड़ी जाँच पड़ताल की गई। चुनाव के दौरान पुतिन के आलोचकों ने जबरन वोट कराए जाने, बैलेट से छेड़खानी और फर्ज़ीवाड़े का आरोप लगाया है। मगर इन सभी आरोपों को रूस के चुनाव आयोग ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।

अब 80 फ़ीसद वोटों की गिनती हो जाने के बाद आरंभिक रुझान पुतिन की पार्टी की बड़ी जीत की ओर इशारा कर रहे हैं जिसे लगभग 50 फ़ीसद वोट मिले हैं जबकि विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी को 20 फ़ीसद वोट हासिल हुआ है।

 

अब भी रूसी जनता के बीच लोकप्रिय पुतिन

इन नतीजों से काफ़ी हद तक ये साफ़ हो जाता है कि पुतिन रूसी जनता के बीच अब भी सबसे लोकप्रिय नेता हैं। हालांकि पार्टी ने अपने कुछ वोट तो ज़रूर खोए हैं। वर्ष 2016 के चुनावों में यूनाइटेड रशिया को 54 फ़ीसद वोट मिले थे। इसके अलावा आम तौर पर संसद में पुतिन के प्रस्तावों का समर्थन करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी के वोट शेयर में इस बार 8 फ़ीसद की बढ़ोत्तरी हुई है।

माना जा रहा है कि रूसी जनता के जीवन स्तर से जुड़ी चिंताएं और उनके विरोधी एलेक्सी नवलनी को जेल भेजे जाने के कारण पार्टी के समर्थकों में गिरावट आई है। लेकिन इन सबके बावजूद पूतिन अब भी रूसी जनता के बीच लोकप्रिय हैं।

रूसी जनता उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ मज़बूती से खड़ा होता है। ग़ौरतलब है तो साल 1999 से पुतिन रूस की सत्ता पर क़ाबिज़ हैं और बीते साल उनकी पार्टी के संविधान में संशोधन के बाद अब वे 2036 तक रूस के क्रेमलिन यानी राष्ट्रपति बने रहेंगे।

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