Thursday, August 4, 2022

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रायबरेली में एक ऐसा गाँव जिसे गोद लेकर अनाथ किया वहां की संसद सोनिया गांधी ने, पढ़िए पूरी दास्तां

by Sachin Singh Rathore
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपनी नई चाल ‘लड़की हूं लड़ सकती हूँ’ से जनता को लुभाने की कोशिश नाकाम साबित हो रही है। इसके साथ-साथ वह अपने अस्तित्व को बचाने की भी लड़ाई लड़ रही है। वहीं भाजपा और सपा के नेता धुआंधार प्रचार में जुटे हैं।

उत्तर प्रदेश की वीवीआइपी सीट माने जाने वाला रायबरेली भी इस बार कांग्रेस के हाथों से ज्यादा दिख रहा है। इस बार यहां पर लड़ाई सपा और भाजपा के बीच ही दिखाई दे रही है। अब तो वहां के लोग खुद कांग्रेस से दूरी बना रहे हैं।

रायबरेली में एक ऐसा गाँव जिसे 2014 से गोद लेकर ठग रहीं सोनिया गाँधी

आइए इसी क्रम में आपको ले चलते हैं, रायबरेली सासद सोनिया गाँधी के गोद लिए उड़वा नामक गांव जो रायबरेली संसदीय क्षेत्र और ऊंचाहार विधानसभा में आता है। 

दरअसल,साल 2014 में स्थानीय सांसद और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसे सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया था। जब उड़वा के लोगों से जांच पड़ताल और विकास पर चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी ने इसे सिर्फ नाम के लिए गोद लिया था ना ही यहां शिक्षा की समुचित व्यवस्था है, ना ही स्वास्थ्य की। गांव की 95 फ़ीसदी आबादी खेती पर निर्भर है लेकिन गांव में सिंचाई के साधनों का कोई इंतजाम नहीं है। गांव के रहने वालों ने कहा कि जब सोनिया गांधी ने इस गांव को गोद लिया था तो हमें बहुत खुशी हुई थी उम्मीद जगी थी कि अब विकास होगा, लेकिन आज इतने साल बाद भी उन्होंने कुछ नहीं कराया।

कांग्रेस को सब कुछ दिया लेकिन कांग्रेस ने हमें कुछ नहीं दिया

वहीं रायबरेली के ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र में जब लोगों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी ने हमारे विधानसभा क्षेत्र के गांव को गोद लिया लेकिन कोई काम नहीं किया। इस पूरे जिले के लोगों को कांग्रेस से उम्मीदें रही है लेकिन कांग्रेस ने यहा की जनता को ठगा है। हमने यहां से कांग्रेस के विधायक दिए, यहां से सांसद दिए लेकिन हमारे साथ हर बार धोखा हुआ। उन्होंने कहा कि इस बार जनता बदलाव की ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बिना किसी भेदभाव के सरकारी योजना का लाभ दिया सरकारी योजनाएं पहले भी थी लेकिन उनका लाभ लोगों को नहीं मिल पाता था और उनकी स्क्रुटनी भी जनप्रतिनिधि नहीं करते थे जो उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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