September 24, 2021

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रूस ने अफ़ग़ानिस्तान पर बातचीत के लिए चीन और पाकिस्तान को बुलाया, भारत को नहीं दिया आमंत्रण

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान द्वारा जारी हिंसा और उसकी आक्रामकता से गहराए संकट पर चर्चा के लिए रूस ने एक अहम बैठक बुलाई है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ इस बैठक में रूस ने अमेरिका, चीन और पाकिस्तान को बुलाया है लेकिन भारत को आमंत्रित नहीं किया है।

 

 

समय के साथ लगातार अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़ा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में रूस ने यह बैठक शांति प्रक्रिया पर बल देने के लिए बुलाई है।

इस बैठक को ‘एक्सटेंडेड ट्रॉइका’ कहा जा रहा है जो 11 अगस्त को क़तर में होनी है। इस बातचीत में भारत को आमंत्रित न किए जाने को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

दरअसल ये सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि पिछले महीने ही ताशकंद में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा था कि रूस अफ़गानिस्तान में जारी हालात के मसले पर भारत को साथ लेकर काम करना जारी रखेगा।
अब इस बयान के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि रूस भारत को भी एक्सटेंडेड ट्रॉइका का हिस्सा होने के लिए आमंत्रित करेगा जो नहीं हुआ।

तालिबान पर भारत का प्रभाव नहीं: रूस

इन अटकलों के बीच इसकी वजह बताते हुए रूस ने कहा कि भारत का तालिबान पर कोई प्रभाव नहीं है। रूसी समाचार एजेंसी तास की रिपोर्ट अनुसार ‘अफ़गानिस्तान में रूसी राजदूत ज़ामिर काबुलोव ने 20 जुलाई को ही कह दिया था कि भारत एक्सटेंडेट ट्रॉइका का हिस्सा नहीं बन सकता क्योंकि उसका तालिबान पर कोई प्रभाव नहीं है।’

रूसी राजदूत ने कहा, “एक्सटेंडेड ट्रॉइका का फ़ॉर्मैट ऐसा है कि इसमें रूस के साथ सिर्फ़ चीन, पाकिस्तान और अमेरिका ही शामिल हो सकते हैं। इस बातचीत में वही देश शामिल हो सकते हैं जिनका दोनों पक्षों (तालिबान और अफ़गानिस्तान) पर स्पष्ट प्रभाव हो।”

अफ़ग़ानिस्तान के लिए भारत की भूमिका

हालांकि भारत हमेशा से ही अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता और शांति का प्रबल समर्थक रहा है। भारत अब तक युद्धग्रस्त अफ़गानिस्तान में पुनर्निमाण और मानवीय सहायता के लिए तीन बिलियन डॉलर तक का निवेश कर चुका है।

बीते दिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ती हिंसा पर स्पष्ट रूप से कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान का अतीत उसका भविष्य नहीं बन सकता।

भारत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अफ़ग़ानिस्तान में गंभीर और हिंसक हालतों पर चर्चा हुई थी जिसके लिए भारत में अफ़गानिस्तान के राजदूत ने भारत का शुक्रिया अदा भी किया था। इस बैठक को बुलाये जाने का आग्रह भी अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद हनीफ़ आत्मर ने किया था।

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