October 26, 2021

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‘बढ़ते पेट्रोल के दामों के लिए राज्य सरकारें ज़िम्मेदार’ – हरदीप सिंह पुरी

बुधवार को पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के लिए राज्यों को ज़िम्मेदार ठहराते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि वे ईंधन को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में नहीं लाना चाहते हैं।

 

Hardeep Singh Puri/Twitter

 

समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए, पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि केंद्र ने ईंधन पर टैक्स को अपरिवर्तित रखा, जबकि कच्चे तेल की कीमत में भारी वृद्धि देखी गई। दूसरी ओर, पुरी ने कहा, तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने जुलाई के बाद से कीमतों में 3.51 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है, जिससे पेट्रोल की प्रति लीटर कीमत 100 से अधिक हो गई है।

उन्होंने कहा, “अगर आपका सवाल है कि क्या आप चाहते हैं कि पेट्रोल की कीमतें कम हों तो इसका जवाब हां है। अब, अगर आपका सवाल है कि पेट्रोल की कीमतें नीचे क्यों नहीं आ रही हैं, तो इसका जवाब है क्योंकि राज्य इसे नीचे नहीं लाना चाहते हैं।”

बता दें कि पुरी पश्चिम बंगाल में बीजेपी उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल के लिए प्रचार कर रहे थे, जो भवानीपुर उपचुनाव में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ रही हैं।

उन्होंने आगे कहा, “केंद्र 32 रु. प्रति लीटर (पेट्रोल पर टैक्स के रूप में) चार्ज करता है। जब ईंधन की कीमत 19 अमरीकी डालर प्रति बैरल थी, तब भी 32 रु. प्रति लीटर चार्ज किया जाता था, और हम अभी भी वही चार्ज कर रहे हैं, जब कीमत बढ़कर 75 अमरीकी डालर प्रति बैरल हो गई है। इसके साथ 32 रू. प्रति लीटर, हम लोगों को मुफ़्त राशन, मुफ़्त आवास और कई अन्य योजनाओं के साथ उज्ज्वला आयोजना दे रहे हैं।”

 

ईंधन कीमतों को GST के दायरे में लाने के प्रस्ताव का महाराष्ट्र ने किया विरोध

पिछले हफ़्ते, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि पेट्रोल और डीजल के मामले को जीएसटी परिषद ने केरल उच्च न्यायालय के निर्देश पर ही उठाया था।

उन्होंने एक प्रेस वार्ता में कहा कि GST परिषद के सदस्य बहुत स्पष्ट थे कि वे ईंधन को जीएसटी के दायरे में नहीं लाना चाहते हैं। ‘अदालत के निर्देश पर, इसे लाया गया और’ सदस्यों ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा कि वे ऐसा नहीं चाहते हैं।

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