December 2, 2021

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लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में यूपी पुलिस की जाँच से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट, कहा ‘स्टेटस रिपोर्ट में कुछ नया नहीं’

3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी कांड से निपटने के मामले में असंतोष जताते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुझाव दिया कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के जस्टिस राकेश कुमार जैन (रिटार्यड) या जस्टिस रंजीत सिंह (रिटायर्ड) को जांच की निगरानी करनी चाहिए।

 

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शीर्ष अदालत ने इकट्ठे किए गए सबूतों का विवरण भी मांगा है, जिसमें आरोपी के मोबाइल फ़ोन से जानकारी और दर्ज किए गए बयान शामिल हैं।

 

‘हम जो उम्मीद कर रहे थे, रिपोर्ट में वैसा कुछ नहीं’

इस दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने यूपी पुलिस के ढीले रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, ‘हमें यह कहते हुए दुख है कि दो FIR 219 और 220 को ओवरलैप कर एक ‘विशेष’ आरोपी को लाभ दिया जा रहा है। कोई ने इशारा किया है कि हिंसा की जांच किसी जज की निगरानी में हो सकती है।
CJI एनवी रमना ने कहा कि हमने स्टेटस रिपोर्ट देखी है। स्टेटस रिपोर्ट में कुछ भी नया नहीं है, हम जो उम्मीद कर रहे थे वैसे कुछ नहीं है। 10 दिन का समय दिया गया था। कोई प्रगति नहीं हुई। बस कुछ गवाहों के बयान हुए। लैब रिपोर्ट भी नहीं आई। फ़ोन रिकॉर्ड का परीक्षण भी नहीं हुआ।’

बता दें कि CJI एन वी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और हेमा कोहली की पीठ उस मामले की सुनवाई कर रही है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश सरकार को गवाह संरक्षण योजना(Witness Protection Team) 2018 के तहत गवाहों को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था।

शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से अन्य गवाहों के बयान दर्ज करने को भी कहा था। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए जाते हैं और उनका साक्ष्य मूल्य होता है।

पीठ ने एक पत्रकार और श्याम सुंदर की भीड़ द्वारा कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या किए जाने पर राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट मांगी थी।

सुप्रीम कोर्ट लखीमपुर खीरी मामले की सुनवाई कर रही है, जिसमें दो वकीलों ने CJI को पत्र लिखकर इस घटना की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की थी, जिसमें सीबीआई भी शामिल है।

राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने 26 अक्टूबर को शीर्ष अदालत को बताया था कि 68 गवाहों में से 30 गवाहों के बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किए गए हैं और अन्य के दर्ज किए जाएँगे।

राज्य की पैरवी कर रहे वकील ने बेंच को बताया, “इन 30 गवाहों में से 23 चश्मदीद गवाह होने का दावा करते हैं।” इसके अलावा उन्होंने कहा कि अब तक 16 आरोपियों की पहचान की जा चुकी है।

इस मामले में पुलिस अब तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत कई आरोपियों को गिरफ़्तार कर चुकी है।

क्या है पूरा मामला?

लखीमपुर खीरी केंद्र द्वारा पारित किये गए तीन कृषी क़ानूनों का विरोध कर रहे चार किसानों को एसयूवी से कुचल दिया। यह घटना तब हुई जब 3 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की यात्रा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया जा रहा था।

गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के दो कार्यकर्ताओं और एक ड्राइवर की कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या कर दी, जबकि हिंसा में एक स्थानीय पत्रकार की भी मौत हो गई।

किसान नेताओं ने दावा किया है कि आशीष मिश्रा उन कारों में से एक में था, जिसने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को नीचे गिराया, हालांकि मंत्री के बेटे ने इन आरोपों से इनकार किया है।

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