September 28, 2021

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पेगासस स्कैंडल पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई केंद्र को फटकार, कहा ‘हम जानना चाहते हैं सरकार क्या कर रही है’

सोमवार को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह कथित पेगासस जासूसी विवाद की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर विस्तृत हलफ़नामा दाखिल नहीं करना चाहता।

 

 

बता दें कि CJI एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच कर रही है सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस मुद्दे पर केंद्र सरकार से नाराज़गी जताई है। CJI रमना ने कहा कि “आप बार-बार उसी बात पर वापस जा रहे हैं। हम जानना चाहते हैं कि सरकार क्या कर रही है। हम राष्ट्रीय हित के मुद्दों में नहीं जा रहे हैं। हमारी सीमित चिंता लोगों के बारे में है। समिति की नियुक्ति कोई मुद्दा नहीं है। हलफ़नामे का उद्देश्य यह होना चाहिए ताकि पता चले कि आप कहां खड़े हैं। संसद में आपके अपने आईटी मंत्री के बयान के अनुसार कि फ़ोन का तकनीकी विश्लेषण किए बिना आकलन करना मुश्किल है।”

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कथित पेगासस स्नूपिंग ऑपरेशंस की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 7 सितंबर को मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र को आगे की याचिका दायर करने का समय दिया था।

इसपर एसजी तुषार मेहता ने कहा, “मैं निजता के हनन का दावा करने वाले कुछ व्यक्तियों के ख़िलाफ़ नहीं हूं। यह गंभीर है और इसमें शामिल होना चाहिए। सवाल यह है कि क्या यह पेगासस है या कुछ और। हमारा रुख है कि इसे हलफ़नामे में डालना राष्ट्रीय हित में नहीं होगा।”

इसके बजाय, केंद्र ने बिना सरकारी सदस्यों के डोमेन विशेषज्ञों की एक समिति बनाने की अनुमति देने पर ज़ोर दिया है।

एसजी मेहता पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि केंद्र का कर्तव्य है कि वह मौलिक अधिकारों से संबंधित तथ्य उपलब्ध कराए। इस बारे में पुष्टि प्रदान करें कि क्या सरकार प्रयुक्त पेगासस “न्याय के लिए हानिकारक” है। उन्होंने आगे कहा कि यह “अविश्वसनीय” है कि सरकार ने कहा कि वह अदालत को जानकारी नहीं देगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 17 अगस्त को भारतीय नागरिकों के ख़िलाफ़ पेगासस स्पाइवेयर के इस्तेमाल के संबंध में दायर विभिन्न याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया था।

माना जाता है कि इज़रायली स्पाइवेयर पेगासस का इस्तेमाल कम से कम 300 भारतीय फ़ोन नंबरों की जासूसी करने के लिए किया गया था। राहुल गांधी, प्रशांत किशोर, अशोक लवासा जैसे दिग्गजों के नाम इसमें शामिल हैं।

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