September 28, 2021

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सुप्रीम कोर्ट ने लगाई केंद्र सरकार को फटकार, कहा ‘अगर अंतिम निर्णय उनका है तो प्रक्रिया का सम्मान कहाँ है?’

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशभर के न्यायाधिकरणों में रिक्त पदों को न भरे जाने पर केंद्र से नाराज़गी जताई और कहा कि जिस तरह से नियुक्तियां की गई हैं, वह स्पष्ट रूप से नामों की “चेरी-पिकिंग” की ओर ही इशारा कर रहा है।

 

Livelaw

 

शीर्ष अदालत ने केंद्र से दो हफ़्ते के भीतर न्यायाधिकरणों में नियुक्तियां करने को कहा, जो फ़िलहाल पीठासीन अधिकारियों के साथ-साथ न्यायिक और तकनीकी सदस्यों की गंभीर कमीं का सामना कर रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि रिक्तियों के कारण न्यायाधिकरणों में स्थिति बेहद ख़राब है और लीगल ऐक्शन के लिए लड़ने वालों को बीच में ही नहीं छोड़ सकते।

बेंच ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा, “जो नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं, वे स्पष्ट रूप से इशारा करते हैं कि उन्होंने चयन सूची में से तीन नामों का चयन किया है और अन्य को वेटिंग लिस्ट से चुना है, चयन सूची में और लोगों को अनदेखा कर दिया गया है। सेवा क़ानून में, आप चयन की अनदेखी करते हुए वेटिंग लिस्ट में नहीं जा सकते हैं। यह किस प्रकार का चयन और नियुक्ति है?”

वेणुगोपाल ने बेंच को आश्वासन दिया कि केंद्र दो हफ़्ते में ट्रिब्यूनल में सर्च एंड सिलेक्शन कमिटी द्वारा अनुशंसित व्यक्तियों की सूची से नियुक्तियां करेगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि ITAT के लिए सर्च एंड सिलेक्शन कमिटी ने 41 लोगों का चयन किया है, और 13 लोगों को ‘हम नहीं जानते’ के आधार पर चुना गया है।

पीठ ने कहा, “यह कोई नई बात नहीं है। हर बार यही कहानी होती है।” CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने COVID के दौरान नामों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए एक विस्तृत अभ्यास किया था और अब पूरे प्रयास व्यर्थ जा रहे हैं।

CJI ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा, “हमने देशभर में यात्रा की। हमने बहुत समय बिताया। कोविड के दौरान, आपकी सरकार ने हमसे जल्द से जल्द साक्षात्कार आयोजित करने का अनुरोध किया। हमने इतना समय बर्बाद किया।”

CJI ने कहा कि ताज़ी नियुक्ति के अनुसार सदस्यों का कार्यकाल केवल एक साल का होगा और, “कौन सा जज एक साल के लिए इस नौकरी में शामिल होने जाएगा?”

चयन समिति द्वारा अनुशंसित नामों को स्वीकार नहीं करने के मुद्दे पर, वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार के पास, की गई सिफ़ारिशों को न स्वीकार करने का अधिकार है।

CJI ने कहा, “हम एक लोकतांत्रिक देश हैं जहां क़ानून के शासन का पालन किया जाता है और हम संविधान के तहत काम कर रहे हैं। आप यह नहीं कह सकते कि मैं इसे स्वीकार नहीं करता।”

पीठ ने कहा, “अगर अंतिम निर्णय सरकार का होगा तो फिर इस प्रक्रिया की पवित्रता क्या है? चयन समिति नामों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए एक विस्तृत प्रक्रिया करती है।”

बता दें कि देशभर में विभिन्न प्रमुख न्यायाधिकरणों और अपीलीय न्यायाधिकरणों में लगभग 250 पद खाली हैं। शीर्ष अदालत न्यायाधिकरणों में रिक्तियों और अर्ध-न्यायिक निकायों को नियंत्रित करने वाले नए क़ानून के मुद्दे पर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

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