December 2, 2021

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लखीमपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई यूपी सरकार को फटकार, कहा ‘रात 1 बजे तक रिपोर्ट का इतंज़ार किया लेकिन कुछ नहीं मिला’

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने गवाहों के बयान दर्ज करने में देरी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई, जिसमें कथित तौर पर गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर आरोप है कि उसने अपनी एसयूवी से 4 किसानों समेत 8 लोगों को कुचल दिया था।

 

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सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली और जस्टिस सूर्यकांत और हिमा कोहल की पीठ ने यूपी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, “हमें लगता है कि आप अपने पैर खींच रहे हैं। आप कृपया इसे दूर करें,” और न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने बाक़ी बयान दर्ज कराने के लिए कहा।

 

कोर्ट में क्या हुआ?

उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है जिसपर बेंच ने रुखाई से कहा कि अगर रिपोर्ट इतनी देरी में दाखिल की जाएगी तो हम कैसे पढ़ेंगे। बेंच ने कहा, “नहीं, इसकी ज़रूरत नहीं थी और हमने अभी इसे प्राप्त किया है… हमने किसी भी फ़ाइलिंग के लिए कल रात 1 बजे तक इंतज़ार किया। लेकिन हमें कुछ भी नहीं मिला”, यह कहते हुए कि अदालत ने सीलबंद लिफ़ाफ़े के बारे में और कोई टिप्पणी नहीं की।

यूपी सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हरीश साल्वे ने शीर्ष अदालत को बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 44 गवाहों में से चार के बयान दर्ज किए गए हैं और अन्य गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने आगे कहा कि दो अपराधों में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील पर पलटवार किया और कहा, “अन्य गवाहों ने अपने बयान क्यों दर्ज नहीं किए?”, जिस पर साल्वे ने जवाब दिया कि यह प्रक्रिया चल रही है और कहा कि दस आरोपियों में से चार पुलिस हिरासत में हैं।

पीठ ने पूछा कि अन्य छह आरोपियों का क्या हुआ। इसपर कहा गया, “आपने हिरासत की मांग नहीं की, इसलिए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।”

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘हम बस यही चाहते हैं कि ये एक अंतहीन कहानी नहीं होनी चाहिए।’
बता दें शीर्ष अदालत ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में दो वकीलों के पत्र के आधार पर सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी।

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की है।

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