September 27, 2021

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शांति बरतने के वादे से मुकर रहा है तालिबान, कई जगहों पर आम नागरिकों से हिंसा की ख़बर

तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में सत्ता हथियाने के बाद से शांति का वादा किया और कहा है कि वे महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करेंगे, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और नज़र आ रही है।

 

 

काबुल से आई तस्वीरें और वीडियो दिखाते हैं कि तालिबान लड़ाके उन महिलाओं और बच्चों को पीटने के लिए नुकीले सामान का इस्तेमाल कर रहे हैं जो देश छोड़ने के लिए काबुल हवाईअड्डे में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। वीडियो में दिखाया गया है कि उग्रवादियों ने भीड़ को हवाई अड्डे से वापस खदेड़ने के लिए गोलियां भी चलाईं। लॉस एंजेलिस टाइम्स के रिपोर्टर मार्कस याम ने बुधवार को ट्विटर पर कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं और साथ ही लिखे टेक्स्ट में दावा किया कि एक महिला और उसके बच्चे सहित कम से कम आधा दर्जन घायल हो गए हैं।

फॉक्स न्यूज़ को एक वीडियो मिला है, जिसमें दावा किया गया है कि तालिबान लड़ाके काबुल और अन्य जगहों की सड़कों पर घूमते हैं और पूर्व सरकारी कर्मचारियों की तलाश में गोलियां चलाते हैं।
समाचार एजेंसी CNN ने भी एक रिपोर्ट छापी है जिसमें जुलाई में फ़रयाब प्रांत में एक महिला की पिटाई के बारे में चौंकाने वाला विवरण था। सीएनएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि लड़ाकों ने एक सुदूर गांव में नज़िया का दरवाज़ा खटखटाया और उसे 15 लड़ाकों के लिए खाना बनाने को कहा।

जब उसने तालिबान लड़ाकों से कहा कि वह ग़रीब है और खाना नहीं बना पाएगी, तो उन्होंने उसे अपनी एके-47 राइफ़ल से पीटना शुरू कर दिया, अगले कमरे में एक ग्रेनेड फेंका और आग की लपटें फैलते ही भाग गए।

रिपोर्ट नज़िया की बेटी मनिझा द्वारा दिए गए अकाउंट पर आधारित थी। पिछले हफ़्ते, संयुक्त राष्ट्र ने दावा किया कि तालिबान द्वारा 1,000 से अधिक नागरिक मारे गए थे और रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति (आईसीआरसी) ने कहा था कि 1 अगस्त से 15 स्वास्थ्य सुविधाओं में लगभग 4,042 घायल लोगों का इलाज किया गया है। हालांकि तालिबान ने अफ़ग़ान सरकार के सैनिकों के ख़िलाफ़ अपने हमले के दौरान नागरिकों को निशाना बनाने और मारने से इनकार किया है और संयुक्त राज्य सरकार ने दावों का खंडन किया है।

काबुल पर कब्जा करने के बाद अपनी पहली समाचार ब्रीफिंग में, तालिबान ने कहा कि वे पहले की तुलना में लोगों पर नर्मी बरतेंगे।

तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने संवाददाताओं से कहा, “हम कोई आंतरिक या बाहरी दुश्मन नहीं चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि महिलाओं को काम करने और अध्ययन करने की अनुमति दी जाएगी और वे “समाज में बहुत सक्रिय रहेंगी लेकिन इस्लाम के ढांचे के भीतर।”
लेकिन इसपर बात पर कई महिलाओं ने संदेह व्यक्त किया है। अफ़ग़ान लड़कियों की शिक्षा कार्यकर्ता 23 वर्षीय पश्ताना दुर्रानी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, “उन्हें बात करनी है। अभी वे ऐसा नहीं कर रहे हैं।” स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि पूरे अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के तेज़ी से बढ़ने के दौरान कई महिलाओं को अपनी नौकरी छोड़ने का आदेश दिया गया है।

अपने पिछले शासन के दौरान, शरिया धार्मिक कानून द्वारा निर्देशित, तालिबान ने महिलाओं को काम करने से रोक दिया था। लड़कियों को स्कूल जाने की अनुमति नहीं थी और महिलाओं को बाहर जाने के लिए बुर्का पहनना पड़ता था और उसके बाद ही पुरुष रिश्तेदार के साथ वे बाहर जा सकती थीं।

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