October 26, 2021

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अफ़ग़ानिस्तान में खोले गए सेकंडरी स्कूल, लेकिन छात्राओं के लिए अब भी बंद हैं परिसर के दरवाज़े

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़े के एक महीने बाद अब सेकंडरी स्कूल खोले जा रहे हैं। इस बाबत नई तालिबान सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को पुरुष शिक्षकों को काम पर वापस लौटने का आदेश दिया।

 

Reuters

 

मंत्रालय ने कहा कि शुक्रिया से 7वीं से लेकर 12वीं तक के स्कूल खोले जाएंगे लेकिन लड़कियों के लिए स्कूल कब खुलेंगे इसकी जानकारी अबतक नहीं दी गई है।

इन हालातों में ये सवाल उठता है कि तालिबान के शासन में आने के बाद घर की चारदीवारी में क़ैद महिला टीचर और छात्राओं का क्या भविष्य होगा।

बता दें कि 2001 तक जब अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सरकार थी तब महिलाओं के न केवल पढ़ने पर पाबंदी थी बल्कि बिना किसी पुरुष के बिना चाहे वह गोद में लिया एक बच्चा ही क्यों न हो, घर से बाहर जाने की इजाज़त नहीं थी।

 

‘बच्चियों का भविष्य गंभीर चिंता का विषय’

तालिबान के दोबारा फैले इस आतंक के बीच युनिसेफ़ ने लड़कों के लिए स्कूलों के खुलने के तालिबान के फ़ैसले का स्वागत किया है लेकिन इसके साथ ही ये भी कहा है लड़कियों को शिक्षा से दूर नहीं किया जाना चाहिए।

UNICEF ने इस ने मानवाधिकारों पर फ़िक्र जताते हुए कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं और बच्चियों का भविष्य ‘गंभीर चिंता’ का विषय है।

संगठन ने कहा, “ये ज़रूरी है कि सभी लड़कियां बिनी किसी देरी के अपनी शिक्षा जारी रख सकें. इसके लिए ज़रूरी है कि महिला शिक्षिकाएं भी काम पर लौटें।”

समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका के सैन्य अभियान के बाद महिलाओं की शिक्षा में काफ़ी विकास हुआ था उनकी साक्षरता दर बढ़कर 30 फ़ीसद हो गई थी। हालांकि ग़ौरतलब ये भी है कि शहरों की तुलना में गांवों में साक्षरता दर काफ़ी कम रही थी।

बता दें कि यहाँ प्राइमरी स्कूल पहले ही खोले जा चुके हैं और लड़के और लड़कियों की पढ़ाई अलग-अलग कक्षाओं में बैठाकर कराई जा रही है, इसके अलावा कई महिला टीचर भी काम पर वापस आई हैं।

 

कैसा था तालिबान का 2 दशक पहले का शासन?

बताते चलें कि तालिबान की इस नई सरकार में छात्राओं को प्राइवेट यूनिवर्सिटी में जाने की इजाज़त दी गई है लेकिन उनके कपड़ों और कैंपस में आने-जाने पर कई तरह की पाबंदियाँ लगाई गई हैं।

तालिबान ने क़ब्ज़े के बाद ये कहा था कि उनकी ये सरकार पहले की सरकार से अलग होगी और इसमें महिलाओं के काम करने पर पाबंदी नहीं होगी।

लेकिन समाचार एजेंसी बीबीसी के मुताबिक़, “इसी हफ़्ते तालिबान ने महिला मामलों के मंत्रालय को ख़त्म कर दिया। इसकी जगह पर शालीनता बढ़ाने, बुराई कम करने के मंत्रालय आ गए है जो तालिबान के पुराने शासन के दौरान सख़्त इस्लामिक क़ानून लागू करने के लिए जाना जाता था।”

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