May 13, 2021

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सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइन: पितृसत्तात्मक विचारों से बचें जज

सुप्रीम कोर्ट ने यौन उत्पीड़न सम्बन्धी कार्यवाही की बाबत 7 नई गाइडलाइन जारी की है। मामला मध्यप्रदेश हाई कोर्ट से जुड़ा है जिसने हाल ही में यौन उत्पीड़न के आरोपी को पीड़िता से राखी बंधवाने की शर्त पर ज़मानत देने का आदेश दिया था। आज सुप्रीम कोर्ट ने इस फ़ैसले की सुनवाई कर उसे पलट दिया है। कोर्ट ने ये भी कहा कि यौन उत्पीड़न के मामलों में जज रूढ़िवादी सोच से बचें और अपराधी और पीड़िता के बीच शादी, मेलमिलाप या समझौता कराने जैसी बात न कहें।
कोर्ट ने अपनी गाइडलाइन में बताया कि ज़मानत की शर्तों में दो पक्षों के बीच संबंध की अनुमति नहीं देनी चाहिए और अपराधी से शिक़ायतकर्ता के उत्पीड़ित को रोकने का प्रयास करना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि सी.आर.पी.सी के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए पितृसत्तात्मक सोच से परे न्याय संगत फ़ैसला देना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त और अभियोजन पक्ष के बीच शादी जैसा सुझाव देना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र और शक्तियों से बाहर है। इसपर किसी भी प्रकार का मेलमिलाप सुझाना संगत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि न्यायालयों को अपनी सीमा का पता होना चाहिये और अपनी लक्ष्मण रेखा पार नहीं करनी चाहिए। साथ ही कोर्ट को अपनी बात रखते समय ज़्यादा सावधनी और संवेदनशीलता बरतनी चाहिए जिससे पीड़िता का आत्म सम्मान चोटिल न हो और कोर्ट की निष्पक्षता भी बरकरार रहे।
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