October 24, 2021

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तालिबान के दो गुटों में शुरू हुआ संघर्ष, पाकिस्तान पर छिड़ा विवाद

तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान पर सैन्य क़ब्ज़े के एक महीने बाद अब कंधारी खण्ड का नेतृत्व करने वाले मुल्ला मोहम्मद याकूब ओमारी और काबुल गुट के प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी के बीच गुटीय लड़ाई देखने को मिल रही है।

 

Credit AP

 

जहाँ एक तरफ़ वीदेशी मीडिया की रिपोर्टों से ये संकेत मिलता है कि हक्कानी गुट द्वारा मुल्ला अब्दुल ग़नी बरादर का अपहरण कर लिया गया है, वहीं काबुल पर नज़र रखने वाले इस बात की पुष्टि करते हैं कि जिस व्यक्ति ने अमेरिका के साथ शांति प्रक्रिया पर बातचीत की थी, उनका कंधार को लेकर मिजाज़ ठीक नहीं है।

रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब के नेतृत्व वाला कंधारी गुट पाकिस्तानी आईएसआई से कोई हस्तक्षेप नहीं चाहता है, जो(पाकिस्तान) अफ़ग़ानिस्तान को पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले क्षेत्र के रूप में देख रहा है।

कहा जा रहा है कि मुल्ला बरादर अपनी ओर से चाहते हैं कि कतर, ब्रिटेन और पाकिस्तान के साथ जो भी बात हुई थी उससे जुड़ी सभी प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया जाना चाहिए और काबुल में अल्पसंख्यकों और महिलाओं के प्रतिनिधित्व के साथ एक समावेशी सरकार बनाई जानी चाहिए।

हालांकि, अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी में स्थिति पूरी तरह से अलग है क्योंकि ISI हक्कानी परिवार की आतंकी कंपनी के ज़रिए काबुल की सत्ता पर नियंत्रण करने की कोशिश में है।

चूँकि हक्कानी नेटवर्क में प्रमुख जादरान जनजाति का काबुल-जलालाबाद अक्ष पर खैबर सीमा तक नियंत्रण है, इसलिए हक्कानी काबुल की सड़कों पर कम से कम 6 हज़ार भारी हथियारों से लैस कैडर भेज रहे हैं।

 

मध्ययुग में जा रहा है अफ़ग़ानिस्तान?

पाकिस्तानी राज्य द्वारा निर्मित, हक्कानी अन्य समुदायों के साथ सत्ता बाँटना नहीं चाहता है और सरकार में महिलाओं के लिए किसी भी तरह की भूमिका को खारिज करता है।

अब जहाँ एक ओर सउदी अरब जैसे रूढ़िवादी देश महिलाओं की आज़ादी को समझने लगे हैं वहीं दूसरी ओर तालिबान पाकिस्तान और तुर्की के कहने पर कट्टर इस्लामी विचारधाराओं को लागू कर अफ़ग़ानिस्तान को मध्ययुग में घसीट रहा है।

अफ़ग़ानिस्तान में समस्या और भी जटिल हो गई है क्योंकि सर्वोच्च नेता हिबतुल्ला अखुंदज़ादा पिछले पांच महीनों से कहीं नज़र नहीं आ रहे रहे हैं। जहां सत्ता के बंटवारे को लेकर कंधारियों और काबुल-वासियों के बीच मतभेदों को सुलझाने में अखुंदज़ादा एक प्रमुख भूमिका निभा सकते थे, वहीं ख़ुफ़िया एजेंसियां ​​कह रही हैं कि आशंका है कि उनकी हत्या हो चुकी हो। उन्हें आखिरी बार ख़ुफ़िया एजेंसियों ने पांच महीने पहले कराँची सेना छावनी में देखा था।

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