September 26, 2021

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‘मीडिया का एक वर्ग साम्प्रदायिक है जो अंततः हिंदुस्तान की बदनामी का कारण बनेगा’ – मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि मीडिया के एक वर्ग में समाचार एक सांप्रदायिक आवाज़ बन गया है जो अंततः देश की बदनामी का कारण बनेगा।

 

Livelaw

 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट पिछले साल दिल्ली में तब्लीगी जमात की सभा से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसे कोविड में उछाल के लिए दोषी ठहराया गया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा, “समस्या यह है कि इस देश में सब कुछ मीडिया के एक वर्ग द्वारा सांप्रदायिक कोण के साथ दिखाया जाता है। यही समस्या है। देश को अंततः बदनाम किया जा रहा है!”
इस याचिका में ‘कोविड की सांप्रदायिक ब्रांडिंग’ करने वाली मीडिया के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने वेब पोर्टलों और यूट्यूब, फ़ेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए फैलाई जा रही फ़र्जी ख़बरों पर भी चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे सोशल मीडिया दिग्गज, जजों को जवाब तक नहीं देते।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म केवल शक्तिशाली पुरुषों की सुनते हैं, उनकी न्यायिक संस्थानों के प्रति कोई जवाबदेही नहीं है। CJI ने कहा, ‘मैं किसी भी सार्वजनिक चैनल, ट्विटर, फ़ेसबुक या यूट्यूब पर नहीं आया हूं।”

बता दें कि दिल्ली की एक अदालत ने 36 विदेशियों को इन आरोपों से बरी कर दिया था, जिन्हें देश की राजधानी में आयोजित तब्लीगी जमात मण्डली में शामिल होने के आरोप में कथित तौर पर लापरवाही बरतने और देश में कोरोनवायरस महामारी के मद्देनज़र जारी सरकारी दिशानिर्देशों की अवहेलना करने के लिए आरोपित किया गया था।

 

Credit- Bar and Bench

 

24 अगस्त को, अदालत ने विदेशियों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश की अवज्ञा), 269 (लापरवाही, जिससे ख़तरनाक बीमारी फैलने की आशंका हो) और धारा 3 (विनियमन की अवज्ञा) के तहत आरोप तय किए थे।

इसके अलावा धारा 51 (बाधा) आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत भी आरोप तय किए गए थे। हालाँकि, उन्हें विदेशी अधिनियम की धारा 14 (1) (बी) (वीज़ा मानदंडों का उल्लंघन) के तहत अपराधों के लिए बरी कर दिया गया था, धारा 270 (घातक कार्य जिससे जीवन के लिए ख़तरनाक बीमारी या संक्रमण को फैलाने की आशंका है) और 271 (संगरोध नियम की अवज्ञा)।

ग़ौरतलब है कि निज़ामुद्दीन क्षेत्र में दिल्ली में तब्लीगी जमात मण्डली में भाग लेने वाले विदेशियों पर कथित तौर पर वीजा मानदंडों का उल्लंघन करने, मिशनरी गतिविधियों में अवैध रूप से लिप्त होने और कोविड -19 के प्रकोप के मद्देनजर जारी सरकारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था।

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