September 26, 2021

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बेरोज़गारी के चलते अवसाद में जनता, 35 वर्षीय व्यक्ति ने की आत्महत्या

भोपाल में एक 35 वर्षीय व्यक्ति, जिसने एक महीने पहले एक आइसक्रीम कारखाने में अपनी नौकरी खो दी थी, ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इसकी सूचना परिवार ने गुरुवार को दी।

 

Reuters

 

व्यक्ति की पत्नी ने कहा कि नौकरी छूटने के बाद वह उदास रहता था और इसलिए उसने शराब पीना भी करना शुरू कर दिया था।

पत्नी ने बताया, ‘उन्होंने नौकरी पाने की कोशिश की लेकिन उन्हें कोविड -19 की संभावित तीसरी लहर के छह महीने बाद आने के लिए कहा गया। हमने उसे डिप्रेशन से बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन वह हमारी एक सुनने को तैयार नहीं था। वो बुधवार को वह देर रात घर वापस आया और उदास होकर बात करने लगा। हमने उसे समझाने की कोशिश की कि अगर वह कोशिश करेगा तो उसे नौकरी ज़रूर मिलेगी।’

पत्नी के अनुसार, इस बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद मृतक ने अपनी जान लेने का प्रयास किया। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया जहां बाद में उसकी मौत हो गई। ‘परिवार के सदस्यों ने कहा कि वह आदमी अवसाद(डिप्रेशन) में था और परिवार के सभी सदस्यों के सामने ख़ुद की जान ले ली।
इस घटना पर जहांगीराबाद के इंस्पेक्टर वीरेंद्र चौहान ने कहा कि हम उनके दावों की जांच कर रहे हैं।

ऐसी ही एक और दुःखद घटना शनिवार को सामने आई जब नौकरी खोने के बाद कथित तौर पर डिप्रेशन के शिकार 51 वर्षीय इंजीनियर ने अपने बेटे और बेटी की गला रेत कर आत्महत्या कर ली। व्यक्ति के 17 वर्षीय बेटे की भी इससे मौत हो गई।

51 वर्षीय व्यक्ति ने तीन पन्नों का एक नोट लिखा जिसमें उसने अपनी आत्महत्या के कारणों के रूप में बेरोज़गारी और ख़राब वित्तीय स्थिति का हवाला दिया।

बंसल अस्पताल, भोपाल के मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी ने कहा, ‘राज्य सरकार को एक नीति या मंच के साथ आना चाहिए जहां आत्महत्या के विचार वाले और तीव्र अवसाद का सामना करने वाले लोग डॉक्टरों से परामर्श ले सकें। कोविड -19 और उसके बाद के लॉकडाउन के कारण लोगों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।’

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