April 11, 2021

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कहाँ से हुई कोरोना की शुरुआत, WHO ने पेश की रिपोर्ट

कोरोना वायरस ने दुनिया के सामने स्वास्थ्य और जीवन से जुड़े सवालों को एक बार फिर प्रासंगिक बना दिया। इन संघर्षों के बीच इसकी उत्पत्ति के स्त्रोतों की न केवल तलाश हुई बल्कि अफ़वाहें और अटकलें भी मज़बूत हुईं। ऐसे में अब ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ ने इसपर एक जाँच की रिपोर्ट जारी की है, जिससे जवाब ही नहीं, कई सवाल भी तैयार होते हैं।
WHO की टीम जाँच के लिए चीन गयी थी जहाँ, बाज़ारों, लैब्स और अन्य जगहों से सैंपल इकट्ठा किये गए और उनपर अध्ययन किया गया।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉक्टर ‘टेड्रोस एडहानोम ग़ेब्रेयेसुस’ ने कहा, “ये रिपोर्ट एक बहुत अच्छी शुरुआत है लेकिन ये अंत नहीं है। हमें अभी वायरस के स्रोत की जानकारी नहीं मिली है।”
चीन के 17 विशेषज्ञों और 17 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के समूह द्वारा जाँच के बाद ये दस्तावेज़ तैयार किया गया है। यह टीम इस साल जनवरी में चीन पहुँची थी जहाँ 12 दिनों तक अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और बाज़ारों का दौरा किया गया और जानकारियाँ जुटाईं गयीं। हालाँकि यह दौरा चीन के प्राधिकरण के सख़्त नियंत्रण में किया गया जिन्होंने इसका शुरुआत में विरोध भी किया था।

रिपोर्ट के चार निष्कर्ष

120 पन्नों की ये रिपोर्ट अपने अध्ययन के बिनाह पर चार निष्कर्ष निकालती है:
1. जानवर से इंसान में पहुँचने की संभावना
रिपोर्ट के मुताबिक़ इस बात के ठोस प्रमाण है कि कई कोरोना वायरसों की उत्पत्ति जानवरों से हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक़ इस संदर्भ में ज़्यादा शंका चमगादड़ पर है क्योंकि चमगादड़ों में कई वायरस होते हैं जो इंसानों में फ़ैल सकते हैं और इनपर ख़तरनाक़ भी साबित हो सकते हैं।
रिपोर्ट में इस बात की भी संभावना जताई गई है कि पैंगोलिन या मिंक भी वो जीव-जंतु हो सकते हैं जिन्होंने इंसानों को संक्रमित किया हो।
2. जानवर से इंसान में फ़ैलने के बीच एक और जीव होने की संभावना
दारस्तावेज़ की ये संभावना कहती है कि जिस जीव-जंतु को पहली बार कोरोना हुआ होगा उसने पहले किसी और जीव को संक्रमित किया होगा जिसके बाद उससे इंसान संक्रमित हुए होंगे।
यह तर्क इसपर बात पर आधारित है कि चमगादड़ों में में पाए गए सार्स-कोविड-2 से सम्बंधित कई वायरस में कुछ भिन्नताएँ हैं, जो बताती हैं कि बीच की एक ‘कड़ी ग़ायब’है।
यह ग़ायब कड़ी कोई जानवर हो सकता है जो इंसानों से पहले वायरस का शिकार हुआ हो और फिर इंसानों के संपर्क में आया हो।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सार्स-कोविड-2 के लिए ज़्यादा संवेदनशील जानवरों में जंगली जानवर भी शामिल हैं जो खेती के लिए पाले जाते हैं।
3. खाने के सामान से इंसानों तक पहुँचने की संभावना
इस संभावना के अंतर्गत वायरस खाने के ज़रिये या उन्हें रखने वाले कंटेनर्स के माध्यम से इंसानों में फैला।
ज़्यादा सम्भावना यह मानी जाती है कि चीन में बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने वाले फ्रोज़न फ़ूड में यह संक्रमण हुआ और फिर इंसानों में आया।
कोरोना के शुरुआती दिनों में चीनी मीडिया ने भी इसपर काफ़ी ज़ोर दिया था।
हालाँकि WHO का यह दस्तावेज़ कहता है कि सार्स कोविड-2 वायरस के खाने से संचरण के कोई निर्णायक सबूत नहीं हैं और वायरस के कोल्ड चेन से फैलने की भी संभावना बहुत कम है।
4. वायरस के प्रयोगशाला से फैलने की संभावना
इसके अंतर्गत यह संभावना जताई गई है कि यह वायरस किसी प्रयोगशाला में हुई दुर्घटना या चूक के ज़रिए इंसानों में फैला।
इस रिपोर्ट में ये स्पष्ट किया गया है कि उन्होंने इस संभावना का विश्लेषण नहीं किया कि क्या यह प्रयोगशाला से इन्सानों में फैला है।
उन्होंने इस बारे में भी पूछताछ नहीं की है कि क्या वायरस प्रयोगशाला में निर्मित किया गया था, क्योंकि वायरस जीनोम के विश्लेषण के आधार पर इस संभावना को पहले ही अन्य वैज्ञानिकों ने ख़ारिज कर दिया है।
हालाँकि रिपोर्ट ये स्वीकारती है कि ऐसी दुर्घटना होने की आशंका बहुत कम है, लेकिन यह हो सकता है।
दस्तावेज़ कहता है, “वायरस की वृद्धि, जानवरों में टीकाकरण या क्लिनिकल सैंपल के साथ काम करने के दौरान सीमित सुरक्षा या लापरवाही के कारण प्रयोगशालाओं में इंसान संक्रमित हो सकते हैं।”
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कोरोनो वायरस पर काम करने वाली वुहान की मुख्य तीन प्रयोगशालाओं में “उच्च-गुणवत्ता वाले जैव सुरक्षा स्तर” हैं। यहाँ किसी भी कर्मचारी में दिसंबर 2019 से महीनों पहले कोविड-19 से संबंधित कोई बीमारी नहीं मिली है।
उन्होंने कहा, “हालाँकि, टीम ने निष्कर्ष निकाला है कि प्रयोगशाला से वायरस लीक होने की संभावना कम है। इस संबंध में और जाँच किए जाने की ज़रूरत है।”
इन सभी बातों से इतर कई ऐसे भी सवाल हैं जिनके जवाबों की तालाश अब भी बाक़ी है।
जैसे चीन का वुहान शहर  जो वायरस के नज़र में आने के साथ ही दुनियाँ की नज़र में भी आ गया था और लगातार इस शहर पर वायरस की उत्त्पत्ति का स्त्रोत होने के आरोप लगते रहे हैं।
लेकिन, जाँच में कहा गया है कि “इस निष्कर्ष पर पहुँचने के कोई सबूत नहीं हैं” कि इस जगह की महामारी की उत्पत्ति में कोई भूमिका है।
“यह बताता है कि हुनान का बाज़ार इस महामारी का असली स्रोत नहीं है।”
इसके अलावा खेती और जानवरों से जुड़ा एक सवाल ये भी उठता है कि क्या खेती के दौरान ही इस संक्रमण का प्रसार हुआ है क्योंकि वहाँ चमगादड़ों की संख्या अधिक होती है।
टेड्रोस एडहानोम ने कहा, “वुहान और अन्य जगहों के बाज़ारों में वायरस पहुँचाने में खेती के जानवरों ने क्या भूमिका निभाई होगी, इसका पता लगाने के लिए और अधिक अध्ययन करना होगा।”
वायरस की उत्पत्ति का संबंध उसके पहले मामले से संबंधित भी है। रिपोर्ट के अनुसार वायरस के इंसानों में दिखने से हफ़्तों पहले इसका प्रसार हो रहा था। इस संबंध में अलग-अलग शोधपत्रों का अध्ययन किया गया और पाया कि चीन में पहला सैंपल पॉज़िटिव आने से पहले ही कई जगहों के सैंपल में यह वायरस मिला था जो बताता है कि ये वायरस पहले ही फैल रहा था।
शोधकर्ताओं ने चेताया है कि “अध्ययन की गुणवत्ता सीमित है” लेकिन सक्रमण के पहले संभावित मामलों की जाँच करना महत्वपूर्ण है।
इस शोध की सफ़लताओं और सवालों की प्रगति के बावजूद, डब्ल्यूएचओ निदेशक ने कहा है, “वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने में समय लगता है। जाँच के लिए की गई एक यात्रा से सभी सवालों के जवाब नहीं मिल सकते।”
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