May 13, 2021

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WHO का नया बयान, कहा अभी दूर है कोरोना का अंत

कोरोना वायरस ने अपनी दूसरी लहर के साथ पूरी दुनिया को भयानक स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। आये दिन हज़ारों की संख्या में लोग अपनी जान गँवा रहे हैं। वैक्सीन को लेकर भी हर देश संपन्न नहीं है, भारत जैसे देश जहाँ वैक्सीन का उत्पादन होता है, वहाँ भी उसकी किल्लत दिखाई पड़ रही है। ऐसे में कोरोना के अंत को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।

इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस अदानोम गेब्रेयसस ने कहा है कि भले ही दुनियाभर में अब तक कोविड-19 के ख़िलाफ़ वैक्सीन की 78 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं, मग़र महामारी का अंत अब भी काफ़ी दूर है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जन स्वास्थ्य के संबंध में कड़े क़दम उठाकर कुछ महीनों में इसे काबू में किया जा सकता है। चीन के वुहान शहर में दिसंबर 2019 में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला सामने आया था और अब तक दुनियाभर में 13,65,00,400 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 29,44,500 की मौत हो चुकी है।
WHO प्रमुख ने कहा, ”दुनियाभर में जनवरी और फरवरी में लगातार छह हफ्तों तक संक्रमण के मामलों में कमी देखी गई। अब हम लगातार सात सप्ताह से मामलों में वृद्धि देख रहे हैं और चार सप्ताह से मौत के मामलों में इजाफा हो रहा है। पिछले सप्ताह, एक सप्ताह में सबसे अधिक मामले सामने आए। उससे पहले तीन बार उससे ज्यादा मामले आए हैं। एशिया और पश्चिम एशिया के कई देशों में मामलों में भारी वृद्धि देखने को मिली है।” 
गेब्रेयसस ने जेनेवा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि टीका शक्तिशाली हथियार तो है लेकिन यही एकमात्र हथियार नहीं है।
Credit- Scroll.in
उन्होंने कहा, ”सामाजिक दूरी कारगर है। मास्क लगाना कारगर है। वेंटिलेशन कारगर है। निगरानी, जांच, संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाना, पृथकवास आदि संक्रमण से निपटने और लोगों का जीवन बचाने उपाय हैं।” डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने आगाह किया कि महामारी का अंत दूर है लेकिन दुनिया के पास आशावादी होने के कई कारण हैं।
बता दें कि विश्वभर में टिकाकरण अभियान तेज़ हो गया है। सभी देशों में वैक्सीन के आयात के लिए होड़ मच रही है। हालाँकि इस बीच ग़रीब देशों की हालत ज़्यादा ख़राब है जहाँ वैक्सीन ख़रीदने के पर्याप्त रिसोर्स नहीं हैं। बता दें कि बीते काफ़ी समय से WHO इस बात को लेकर चिंता जता रहा है और सभी देशों से समान रूप से टिके के वितरण की बाबत ग़रीब देशों से सहयोग की बात पर ज़ोर भी दे रहा है।
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