April 11, 2021

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पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता क्यों चाहती हैं लेफ़्ट का समर्थन?

बंगाल में जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक़ आ रहे हैं, अटकलों का बाज़ार भी गर्म होता दिख रहा है। नारों और वादों के बीच फँसी जनता को पार्टियाँ अलग-अलग ढंग से इस्तेमाल करने की तैयारी भी कर रही हैं। जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समूचे बंगाल का बैनर लेकर चल रही हैं वहीं दूसरी ओर लोग उन्हें अकेला भी बताया जा रहा है। इन सभी बातों के बीच ममता बनर्जी ने लेफ़्ट पार्टियों से समर्थन की अपील की है। यह पहली बार नहीं है कि उन्होंने ऐसा कहा हो, बीती जनवरी को भी उन्होंने लेफ़्ट से तृणमूल कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही थी, लेकिन यह बात अब ताज़ा यूँ हुई कि ममता ने एक बार फिर इसे दोहराया है।
ममता बनर्जी ने कहा – “लेफ़्ट मौजूदा चुनावों में जीत कर सत्ता में नहीं आ सकता। इसलिए उसके समर्थकों को लेफ़्ट फ्रंट का समर्थन कर अपना वोट बर्बाद नहीं करना चाहिए। इसके बजाय उनको बीजेपी को हराने के लिए टीएमसी को वोट देना चाहिए।” 
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह बात घूमने लगी है कि क्या ममता को अब भाजपा से चनौती कठिन लगने लगी है?
क्या ममता को हासिल होगा समर्थन?
लेफ़्ट पार्टियों का गठजोड़ कांग्रेस के साथ होने तक स्थिति सामान्य थी पर इस बार के चुनाव में ‘इंडियन सेक्युलर फ्रंट’ जो की पीरज़ादा अब्बासी की पार्टी है, के साथ गठबंधन में शामिल होने से ख़बर है कि वोटरों का एक समूह नाख़ुश है। उनका मानना है कि यदि इस साम्प्रदायिक पार्टी का समर्थन ले सकते हैं तो किसी और का क्यों नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी नाराज़गी के चलते ममता बनर्जी ने अपने समर्थन में लेफ़्ट से वोट की माँग की है।
हालाँकि लेफ़्ट इससे पूरी तरह नकारता नज़र आ रहा है जहाँ सीपीएम ने कहा कि ममता ने बीते वर्षों में लेफ़्ट के दमन की राजनीति की है और उनके कई कार्यालयों को भी बंद करवा दिया है। अब उन्हें आभास हो गया है कि उनका सत्ता में लौटना सम्भव नहीं है इसलिए वो इस तरह की अपील कर रही हैं।
बता दें इस बयान का असर राजनीति गलियारों में अटकलों को जनने वाला है, जहाँ लोग इसे लड़ाई से पहले हार क़ुबूल करने की बात बता रहे हैं। अब देखना होगा कि पिछले चुनाव के आधार पर कम से  कम 6 फ़ीसद तक का वोट शेयर रखने वाली लेफ़्ट पार्टियाँ बंगाल चुनाव की सूरत पर क्या असर डालेंगी।
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