May 13, 2021

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जेडीयू की मीडिया में आवाज़, क्यों हैं नाराज़ अपने ही लोग?

बिहार में जेडीयू में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। विधान परिषद की 12 सीटों के लिए राज्यपाल ने 12 लोगों को मनोनीत किया। इसमें छह बीजेपी से और छह जेडीयू से हैं। मुकेश साहनी और जीतन राम मांझी की पार्टी को कुछ भी नहीं मिला है। लेकिन नाराज़गी के सुर जेडीयू से आए हैं।

सबसे ज़्यादा नाराज़ वो नेता हुए हैं जिन्होंने बुरे दौर में भी जेडीयू का दामन नहीं छोड़ा और मीडिया में पार्टी के कामों पर दूसरे दलों से भिड़ते रहे। राजीव रंजन प्रसाद जेडीयू के प्रवक्ता हैं और पुराने समाजवादी नेता। उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें या उनके जैसे किसी पुराने कार्यकर्ता को पार्टी ज़रुर मौका देगी। लेकिन जेडीयू ने 72 घंटे पहले पार्टी में शामिल हुए और नीतीश के ख़िलाफ़ समीकरण बनाते रहे और पार्टी में फिर से वापसी करने वाले उपेंद्र कुशवाहा को मौका दे दिया।

राजीव रंजन प्रसाद आहत हुए और उन्होंने कहा कि पिछले लंबे समय से कायस्थ समाज को हाशिए पर रखने की कोशिश की जा रही है, पहले विधानसभा में अनदेखी की गई और अब विधान परिषद में उन्हें दरकिनार किया गया। राजीव रंजन ने सीएम नीतीश कुमार को टैग करते हुए एक ट्वीट किया जिसमें लिखा, ‘योग्यता ,कर्तव्यपरायणता और निष्ठा जैसे शब्द, शब्दकोष में ही बने रहेंगे। ये शब्द अब सियासत के लिए बेमानी हो गए हैं।

राजीव रंजन प्रसाद उस वक्त पार्टी के साथ खड़े रहे जब बीजेपी जेडीयू अलग हुई थी ओर उन्होंने पार्टी के निर्देश पर उस सीट से चुनाव लड़ा जहां पार्टी ने कभी उम्मीदवार ही नहीं उतारे थे। वे हार गए लेकिन अच्छे वोट मिले।फिर वहां के लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहे। 2020 विधानसभा चुनाव में वो सीट बीजेपी के खाते में गई। लेकिन राजीव रंजन प्रसाद ने कोई दबाव नहीं बनाया। बावजूद इसके जब विधान परिषद में 12 सदस्यों का मनोनयन हुआ और उसमें राजीव रंजन प्रसाद का नाम नहीं था तो उन्होंने नतृत्व पर अनदेखी करने को लेकर सवाल उठाए हैं। अब देखना होगा कि नीतीश कुमार इस मामले पर क्या रुख़ अपनाते हैं।

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