October 26, 2021

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क्यों कांग्रेस के हुए कन्हेया कुमार?

जेएनयू से छात्र राजनीति की शुरुआत करने वाले कन्हैया कुमार ने बहुत कम समय में सियासत में अपनी पहचान बनाई। अपने भाषणों के ज़रिए उन्होंने हिंदी पट्टी में लोगों को कनेक्ट किया और जल्द ही सीपीआई में बड़े नेता बन गए। लेकिन 2019 चुनाव में कन्हैया कुमार बेगूसराय से बुरी तरह हार गए। हार के अंतर ने स्पष्ट कर दिया कि कन्हैया कुमार का भाषण सुनने लोग भले पहुंचे लेकिन उन्हें वोट नहीं मिला। जो वोट मिला वो सीपीआई काडर का था उसमें भी कमी ही आई। स्पष्ट था काडर भी पूरी तरह कन्हैया के तौर तरीकों से खुश नहीं था।

राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सीपीआई में कन्हैया की पूछ घटने लगी। सूत्र बताते हैं वो राष्ट्रीय स्तर पर सीपीआई में अहम पद चाहते थे लेकिन पार्टी इसके लिए तैयार नहीं थी। यही वजह है कि लंबे समय से वो पार्टी के किसी कार्यक्रम तक में नज़र नहीं आए। कन्हैया कुमार के पास सीपीआई में बहुत आगे बढ़ पाने की गुंजाइश फिलहाल नहीं थी इसकी वजह है कि सीपीआई काडर बेस्ड पार्टी है। नेताओं के आने जाने से उनके वोट बैंक पर कोई असर नहीं पड़ता है। हालाकि कन्हैया को लग रहा था कि वो पार्टी के बिहार में सबसे बड़ा चेहरा हैं। लेकिन पार्टी की सोच उनको लेकर बिल्कुल भी ऐसी नहीं थी।

लेकिन सवाल है कांग्रेस ही क्यों? इसके पीछे माना जा रहा है प्रशांत किशोर की रणनीति है। जिसके मुताबिक कांग्रेस को ज़्यादा से ज़्यादा युवा नेताओं को ख़ुद से जोड़ना चाहिए। इसको ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने ऑपरेशन कन्हैया शुरु किया। उन्हें पार्टी में बड़ी ज़िम्मेदारी मिल सकती है साथ ही बिहार और बाहर प्रचार का ज़िम्मा भी। लेकिन सवाल ये उठ रहा है जो कन्हैया सीपीआई को कामयाबी नहीं दिला पाए वो कांग्रेस के लिए कैसे करिश्मा कर पाएंगे? एक और सवाल है कि कांग्रेस में गुटबाज़ी कई राज्यों में है। इससे बिहार भी अछूता नहीं है। ऐसे में कन्हैया को क्या बिहार कांग्रेस के नेता खुले मन से स्वीकार कर पाएंगे?


इन सबके साथ ही कांग्रेस का मिशन 2024 है। बिहार और यूपी दो ऐसे राज्य हैं जहां कुल मिलाकर कांग्रेस के दो सांसद हैं, जबकि लोकसभा की 120 सीटें हैं। ऐसे में इन दोनों राज्यों में कांग्रेस कैसे खुद को मज़बूत करती है इसपर सबकी नज़र है। आनेवाले दिनों में कन्हैया की तरह और भी नेता कांग्रेस में शामिल होते दिख सकते हैं। लेकिन इससे वोट मिलेगा ये कहना जल्दबाज़ी होगी

              – मिहिर गौतम –      

                                          (लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार है और एक बड़े मीडिया हाउस का प्रतिनिधित्व करते है)

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