Thursday, August 4, 2022

MOTHER LAND POST

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देश-विदेश: विश्व महिला दिवस के ठीक पहले पाकिस्तान में क्यों हो रही है सिंध प्रांत की महिलाओं की चर्चा?

by Disha
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पाकिस्तान के सिंध में महिलाओं का जीवन हमेशा से संघर्षशील रहा है। अब 8 मार्च यानी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से पहले देश में हैशटैग #SaveDaughtersOfSindh ट्रेंड कर रहा है

 

Credit: Dawn

 

बिजनेस रिकॉर्डर की रिपोर्ट के अनुसार, हैशटैग उन लड़कियों के लिए चलाया जा रहा है जो मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं और उन्हें कॉलेज एडमिन्स द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है और सरकार द्वारा पूरी तरह से अनदेखा किया जाता है।

सिंध प्रांत में एक मेडिकल कॉलेज की दो छात्राओं द्वारा हाल ही में आत्महत्या पाकिस्तान में शैक्षणिक संस्थानों और कार्यस्थलों सहित कई स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के संबंध में गंभीर खामियों की ओर इशारा करती है।

बिजनेस रिकॉर्डर में लिखते हुए एंडलीब अब्बास ने कहा है कि सिंध एक ऐसी ज़मीन है जहाँ जंगल राज है। वहाँ कोई क़ानून नहीं है। इस राज्य में “वडेरा राज” (शक्तिशाली शासन)
का बोलबाला है जहाँ बंदूकों के बल पर लूट होती है, घर जलाए जाते हैं और उन्हीं द्वारा यह तय होता है कि किसे साँस लेने का अधिकार है और किसे नहीं।

इसके अलावा, सिंध की ग़रीबी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में बेहद बुरी हालत है। यहाँ स्कूल या तो केवल काग़ज़ पर हैं, जैसा कि हाल ही में एक रिपोर्ट में 1,459 घोस्ट स्कूल होने की बात सामने आई थी, या तो वहाँ शिक्षकों की भी सुविधा नहीं है।

बता दें कि सिंध की साक्षरता दर बढ़ने के बजाय 63 प्रतिशत से गिरकर 62 प्रतिशत हो गई है। स्वास्थ्य सुविधाएं एक टाइम बम की तरह हैं। यहाँ कुत्ते के काटने से ‘महामारी’ फैली है और बच्चे कुपोषण से मर रहे हैं। यही नहीं, यहाँ 6,000 बच्चे एचआईवी/एड्स से ग्रसित हैं। अब्बास बताती हैं कि जैसे-जैसे लोग ग़रीब होते जाते हैं, उनके लिए प्रतिरोध एक विलासिता की वस्तु बन जाता है।

उन्होंने चंडका मेडिकल कॉलेज के परवीन रिंद के बहादुरी भरे क़दम की सहायता करने की भी बात की। चांदका कांड में छात्रा परवीन रिंद ने ख़ुलासा किया कि कैसे उसकी जान को ख़तरा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन दो अन्य लड़कियों ने कथित तौर पर आत्महत्या की थी, उन्हें असल मे मार दिया गया था।

उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री डॉ अजरा पेचुहो से मुलाक़ात की और उन्हें शरीर के घाव दिखाए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब्बास ने कहा कि उनके लिए लगातार सतर्कता और उच्च स्तरीय सुरक्षा की ज़रूरत है।

कॉलेजों, कार्यस्थलों आदि में महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है और उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है और इसलिए अब्बास ने सुझाव दिया कि यहाँ एक “मीटू” आंदोलन शुरू करना आवश्यक है जो इन मंडलियों में बढ़ती असुरक्षा और उत्पीड़न पर नज़र रख सके।

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