September 27, 2021

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‘एक महिला मंत्री नहीं हो सकती, उसे केवल बच्चे पैदा करने चाहिए’ – तालिबान

तालिबान के प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि महिलाओं को मंत्री नहीं बनना चाहिए उन्हें केवल बच्चे ही पैदा करने चाहिए। ‘एक महिला मंत्री नहीं हो सकती, यह ऐसा है जैसे आप उसके गले में कुछ डाल देते हैं जिसे वह नहीं उठा सकती।’

 

Reuters

 

‘महिलाओं का कैबिनेट में होना ज़रूरी नहीं, उन्हें केवल बच्चे पैदा करने चाहिए।’ तालिबान के प्रवक्ता सैयद जेकरुल्ला हाशिमी ने टोलो न्यूज़ को बताया कि महिला प्रदर्शनकारी अफ़ग़ानिस्तान में सभी महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती हैं।

बता दें कि इन प्रदर्शन के दौरान दो पत्रकारों को पुलिस हिरासत में बुरी तरह पीटा गया, जो प्रदर्शन कवर करने गए थे।

एतिलात रोज़ अख़बार के संस्थापक और प्रधान संपादक ज़की दरयाबी ने सोशल मीडिया पर दो पुरुष पत्रकारों की तस्वीरें साझा कीं, जिनमें से एक उनकी पीठ के निचले हिस्से और पैरों में बड़े, लाल धब्बे वाले और दूसरे के कंधे और बांह पर समान निशान थे। समाचार एजेंसी रॉयटर्स द्वारा जारी की गई दोनों पत्रकारों की तस्वीरों में चेहरे पर भी चोट के निशान दिखाई दे रहे हैं।

इसके पहले तालिबान शासन के तहत, महिलाओं को काम और शिक्षा से प्रतिबंधित कर दिया गया था। समूह ने हाल के हफ़्तों में कहा है कि महिलाओं को काम करने और विश्वविद्यालय में पढ़ने की अनुमति दी जाएगी लेकिन इस्लामी क़ानून के मापदंडों के भीतर।

 

’20 साल पीछे’

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी का कहना है कि मई के अंत से अब तक जो लोग भागे हैं उनमें से लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे हैं। एक गुमनाम अफ़ग़ान महिला ने द गार्जियन में लिखा: ‘मुझे उम्मीद नहीं थी कि हम फिर से अपने सभी बुनियादी अधिकारों से वंचित हो जाएंगे और 20 साल पिछे पहुँच जाएंगे। अपने अधिकारों और आज़ादी की लड़ाई के 20 साल बाद अब हमें बुर्के की तलाश करनी होगी और अपनी पहचान छुपानी होगी।’

कई अफ़ग़ान महिला पत्रकारों ने कहा है कि तालिबान ने उन्हें काम करने की अनुमति नहीं दी। आरटीए (रेडियो टेलीविजन अफ़ग़ानिस्तान) की एक एंकर शबनम खान दावरान ने कहा कि वह अपने कार्यालय में प्रवेश नहीं कर सकीं। दावरान ने टोलो न्यूज़ से बताया, “मैं काम पर लौटना चाहती थी, लेकिन दुर्भाग्य से उन्होंने मुझे काम करने नहीं दिया। उन्होंने मुझसे कहा कि शासन बदल गया है और आप काम नहीं कर सकती हैं।”

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेस ने तालिबान को मानवाधिकारों पर अंकुश लगाने और महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ बढ़ते उल्लंघन की चेतावनी दी है।

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