December 2, 2021

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‘चुनावों से पहले जनता को लॉलीपॉप न दें’, पंजाब मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर नवजोत सिंह सिद्धू का निशाना

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा हाल ही में घोषित मुफ्त उपहारों का ज़िक्र करते हुए, राज्य कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को उन राजनेताओं पर हमला किया जो चुनावों से ठीक पहले “लॉलीपॉप” की पेशकश करते हैं और कहा कि पंजाब का कल्याण एक रोडमैप से आता है, न कि रणनीति से।

 

Navjot Singh siddhu/Twitter

 

पार्टी के भीतर की कलह अभी भी राज्य में कायम है। मुख्यमंत्री द्वारा राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी और घरेलू क्षेत्र के लिए बिजली दरों में 3 रुपये प्रति यूनिट की कटौती की घोषणा के बाद पंजाब में अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ सिद्धू ने हमला बोल दिया है।

नवगठित संयुक्त हिंदू द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सोमवार को चंडीगढ़ में महासभा में उन्होंने कहा, “दो महीने पहले लोगों को लॉलीपॉप दो। सवाल यह है कि वे (सरकार) इसे कहां से देंगे? क्या सिर्फ़ झूठ बोलकर और झूठे वादे करके सरकार बनाने का उद्देश्य है? पंजाब के कल्याण का रास्ता रोडमैप से आता है।”

राजनेताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों को मुफ्त उपहार की घोषणा करके मतदाताओं को लुभाने की रणनीति में शामिल न होने की सलाह देते हुए, उन्होंने लोगों से राज्य के विकास के उद्देश्य वाले एजेंडे पर वोट करने का आग्रह किया।

 

“मैं हूँ ना”

उन्होंने आगे राज्य सरकार की खिंचाई करते हुए कहा, “पंजाब पर 5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। अगर लोगों को लगता है कि यह कर्ज सरकार द्वारा चुकाया जाएगा, तो वे ग़लत हैं। बोझ लोगों द्वारा वहन किया जाएगा। अगर खजाना ओवरफ्लो हो रहा है, तो वे शिक्षकों का वेतन 50,000 रुपये प्रति माह से क्यों नहीं बढ़ाते हैं?”

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने अपने आप को सीएम मटेरियल बताते हुए कहा कि आलाकमान को ‘ज़मीन’ से ‘असली नेता’ चुनना चाहिए।

उन्होंने कहा, “इसी अदालत में निर्णय लिए जाएंगे। ऐसा मत सोचो” कि गुरु न्याय नहीं करता। वह परख करता है। ऐसा करने से वह सरकारें बदलीं… असली मज़दूर रेत में गहनों की तरह होते हैं, उन्हें पंजाब के ताज में सजा दो। अंत में मैं कहूंगा कि “मैं हूं ना”।

बता दें कि पिछले कई महीनों से पार्टी की पंजाब इकाई में सियासी रस्साकशी जारी है। इसी कड़ी में कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया था और बाद में दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को इस पद पर क़ाबिज़ किया गया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में सिद्धू बहुत सहमत नज़र नहीं आए और लगातार सरकार और नेताओं पर सवाल उठा रहे हैं।

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